भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस: 15 अगस्त की तारीख का महत्व
भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस
भारत 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए तैयार है। क्या आप जानते हैं कि ब्रिटिश शासन ने भारत से बाहर निकलने के लिए जून 1948 की समय-सीमा निर्धारित की थी? यह जानना दिलचस्प है कि भारत को 15 अगस्त, 1947 को 10 महीने पहले स्वतंत्रता कैसे मिली।
15 अगस्त की तारीख का चयन
लॉर्ड लुइस माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख का चयन किया, ताकि वे युद्ध के समय की अपनी जीत को एक नए राष्ट्र के जन्म के साथ जोड़ सकें।
ब्रिटिश शासन की कमजोरी
1947 की शुरुआत में, भारत में ब्रिटिश शासन कमजोर हो रहा था। सत्ता के हस्तांतरण पर ब्रिटिश प्रस्ताव 1946 के कैबिनेट मिशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता कराने में असफल रहा।
जिन्ना का डायरेक्ट एक्शन डे
16 अगस्त 1946 को मुहम्मद अली जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन डे का आह्वान किया, जो मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की मांग को मजबूती देने के लिए था। इसने कलकत्ता में सांप्रदायिक हिंसा को जन्म दिया, जो बाद में पूर्वी बंगाल, बिहार और पंजाब तक फैल गई।
लॉर्ड वेवेल का दबाव
लॉर्ड वेवेल ने प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली पर भारत से निकलने की एक निश्चित तारीख तय करने का दबाव डाला। उनका प्रस्ताव, जिसे ब्रेकडाउन प्लान कहा गया, को जनवरी 1947 में खारिज कर दिया गया।
लॉर्ड माउंटबेटन की नियुक्ति
20 फरवरी 1947 को एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा कि ब्रिटेन जून 1948 से पहले भारत को स्वतंत्रता देगा। लॉर्ड माउंटबेटन को इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया।
ब्रिटिशों की जल्दी वापसी
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ बातचीत के बाद, माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को बंटवारे का अपना प्लान पेश किया। इस योजना में नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में जनमत संग्रह कराने की बात थी।
स्वतंत्रता का समय
माउंटबेटन के प्लान के अनुसार, भारत को सत्ता सौंपने की तारीख 10 महीने पहले हो गई। उनका मानना था कि ब्रिटिश शासन को और खींचने से उपमहाद्वीप पर नियंत्रण रखना मुश्किल होगा।
कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ही जल्दी सत्ता हस्तांतरण चाहती थीं। माउंटबेटन का आकलन था कि जल्दी अलग होने से दोनों पक्षों के बीच विवाद कम होंगे।
