भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश: दुनिया से दोहरे मापदंड खत्म करने की अपील
संयुक्त राष्ट्र में भारत की जीरो टॉलरेंस नीति
संयुक्त राष्ट्र/नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आतंकवाद के प्रति अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को स्पष्ट करते हुए सभी देशों से इस वैश्विक समस्या के खिलाफ एकजुट होकर ठोस कदम उठाने की अपील की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि किसी भी कारण, विचारधारा या परिस्थिति के नाम पर आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया को अब दोहरे मापदंडों को छोड़ना होगा। आतंकवादी को अच्छा या बुरा नहीं माना जा सकता; वे केवल आतंकवादी होते हैं। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले, उसे वित्तीय सहायता देने वाले और आतंकियों को शरण देने वाले देशों को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
हरीश पर्वथानेनी ने बताया कि भारत दशकों से सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है, जिसके कारण हजारों लोगों की जान गई है, परिवार बिखरे हैं और समाज को भारी नुकसान हुआ है। इस अनुभव के आधार पर भारत का मानना है कि आतंकवाद के समर्थन में कोई भी तर्क स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारणों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आतंकवादी हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। सबसे महत्वपूर्ण मानवाधिकार जीने का अधिकार है, और आतंकवाद इसी मूल अधिकार पर सबसे बड़ा हमला है।
भारत ने आतंकवाद की फंडिंग को रोकने पर भी जोर दिया। भारत ने कहा कि आतंकियों तक पहुंचने वाले धन को रोकने के लिए देशों के बीच वित्तीय खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बढ़ाना चाहिए और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मानकों को सख्ती से लागू करना चाहिए, ताकि आतंकवादी संगठनों की आर्थिक गतिविधियों को कमजोर किया जा सके।
भारत ने यह भी चिंता व्यक्त की कि आतंकवादी संगठन आधुनिक तकनीकों का दुरुपयोग कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर कोई ठोस सहमति न बन पाने को भारत ने निराशाजनक बताया और तकनीकी संसाधनों को आतंकियों की पहुंच से दूर रखने के लिए एक प्रभावी वैश्विक व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में भारत ने सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की बात की और कहा कि किसी भी धर्म, जाति या नस्ल के खिलाफ नफरत स्वीकार्य नहीं है। भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को केवल इस्लाम, ईसाई या यहूदी समुदाय के खिलाफ नफरत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हिंदू, सिख, बौद्ध और अन्य सभी धर्मों के खिलाफ होने वाले घृणा अपराधों और भेदभाव पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
भारत ने यह भी याद दिलाया कि उसने लगभग 30 वर्ष पहले व्यापक अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक सम्मेलन (CCIT) का प्रस्ताव रखा था, जो अब तक लंबित है। भारत का कहना है कि इस वैश्विक कानूनी ढांचे के अभाव में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई कमजोर पड़ रही है।
भारत ने दुनिया के देशों से राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने और जल्द से जल्द इस वैश्विक कानून को पारित करने की अपील की, ताकि आतंकवादियों को कहीं भी शरण, वित्तीय सहायता और हथियार उपलब्ध न हो सकें।
