भारत का पासपोर्ट ग्लोबल रैंकिंग में 125वें स्थान पर, यात्रा की सुविधा में गिरावट
भारत की पासपोर्ट रैंकिंग
भारत का पासपोर्ट ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में 125वें स्थान पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 124वें स्थान से एक पायदान नीचे है। यह रैंकिंग ग्लोबल सिटीजन सॉल्यूशंस (GCS) द्वारा 197 देशों के लिए जारी की गई है।
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स का महत्व
यह इंडेक्स केवल वीजा-मुक्त यात्रा को ही नहीं, बल्कि अन्य देशों में निवास, कार्य और निवेश की सुविधाओं को भी ध्यान में रखता है। भारत का स्कोर 451 है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अच्छा है।
भारत की यात्रा की रैंकिंग
यात्रा की सुविधा के मामले में भारत 136वें स्थान पर है। नामीबिया 124वें और अजरबैजान 126वें स्थान पर हैं। भारत की रैंकिंग विभिन्न श्रेणियों में इस प्रकार है:
- इनहैंस्ड मोबिलिटी इंडेक्स: 136वें स्थान पर, पिछले वर्ष से एक पायदान नीचे।
- क्वालिटी ऑफ लिविंग इंडेक्स: 118वें स्थान पर, पिछले वर्ष की तुलना में 11 अंक का सुधार।
- इन्वेस्टमेंट इंडेक्स: 94वें स्थान पर, पिछले वर्ष की तुलना में 3 रैंक का सुधार।
बिना वीजा यात्रा की संभावनाएं
भारतीय पासपोर्ट धारक 26 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल यात्रा कर सकते हैं, जिनमें भूटान, नेपाल, जमैका, मकाऊ, फिलिस्तीन, ट्यूनीशिया, अंगोला और बारबाडोस शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन और UAE जैसे 88 देशों में वीजा की आवश्यकता होती है।
टॉप 10 देशों की सूची
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में शीर्ष 10 देश इस प्रकार हैं:
- स्वीडन
- स्विट्जरलैंड
- फिनलैंड
- जर्मनी
- नीदरलैंड्स
- डेनमार्क
- आयरलैंड
- यूनाइटेड किंगडम
- नॉर्वे
- सिंगापुर
यूरोप और एशिया का मुकाबला
टॉप 10 में अधिकांश देश यूरोप के हैं। स्वीडन पहले स्थान पर है, क्योंकि यह यात्रा, निवेश और जीवन स्तर की तीनों श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत की स्थिति
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025-26 में भारत 80वें स्थान पर है, जहां भारत को 56 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है। भारत ने जीवन स्तर और निवेश में सुधार किया है, लेकिन यात्रा की सुविधा में और सुधार की आवश्यकता है।
भारत की रैंकिंग का कारण
ग्लोबल सिटीजन सॉल्यूशंस के 'ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026' में भारत की रैंकिंग चिंताजनक है। यह रैंकिंग बिना वीजा यात्रा, निवेश क्षमता, जीवनशैली और नागरिकों की जीवन गुणवत्ता के आधार पर तैयार की जाती है। भारतीय वीजा की ताकत विकसित देशों की तुलना में सीमित है, जो इस रैंकिंग में पीछे रहने का एक कारण है।
