भारत का समर्थन: संयुक्त राष्ट्र में नया विश्व मानचित्र बनाने की पहल
संयुक्त राष्ट्र में नया नक्शा बनाने की दिशा में कदम
नई दिल्ली: भारत सहित 164 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में एक अधिक सटीक और संतुलित विश्व मानचित्र बनाने के लिए उठाए गए कदम का समर्थन किया है। यह प्रस्ताव, जिसे अफ्रीकी देश टोगो ने प्रस्तुत किया, 'इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन' के नाम से जाना जाता है। शुक्रवार को इस पर मतदान हुआ, जिसमें 193 सदस्य देशों में से 164 ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। कुछ देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने इस प्रस्ताव के प्रति अपना समर्थन स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस विश्व मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार दिखाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित किसी भी गलत चित्रण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत का समर्थन क्यों?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि, यह समर्थन किसी विशेष मानचित्रण तकनीक या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण के लिए नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत ने ऐसी 'इक्वल एरिया' मैपिंग तकनीकों का समर्थन किया है, जो विभिन्न भूभागों के क्षेत्रफल को वास्तविक अनुपात में दर्शाती हैं।
विश्व मानचित्र में बदलाव की आवश्यकता
दुनिया में लंबे समय से उपयोग में लाया जा रहा मर्केटर मैप 1569 में तैयार किया गया था। इसमें ध्रुवों के निकट के क्षेत्र अपने वास्तविक आकार से बड़े दिखाई देते हैं, जिससे अफ्रीका का आकार भी छोटा नजर आता है, जबकि उसका क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना अधिक है।
इस असमानता को दूर करने के लिए 2018 में 'इक्वल अर्थ' मैप विकसित किया गया था, जिसे फरवरी 2026 में अफ्रीकी संघ के सभी 54 देशों ने अपनाया। अब टोगो ने इसी तरह की 'इक्वल एरिया' मैपिंग को संयुक्त राष्ट्र स्तर पर बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। मतदान में एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने भाग नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ एकमात्र वोट दिया।
