भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति: मोदी और ट्रंप के रिश्तों का विश्लेषण
भारत और अमेरिका के रिश्तों की नई परिभाषा
हेनरी किसिंजर, जो उस समय के अमेरिकी विदेश मंत्री थे, ने उल्लेख किया कि इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति निक्सन को ऐसे डपटा जैसे एक प्रोफेसर अपने कमजोर छात्र को डांटता है। हाल ही में, फ्रांस में ट्रंप को 'एक्सीलेंसी' कहकर संबोधित किया गया, जो कि एक उच्च दर्जे का संबोधन है।
शिमला समझौता, जिसे भारत की जीत के रूप में देखा गया था, की भाजपा ने उस समय कड़ी आलोचना की थी। आज वही समझौता इस्लामाबाद में सराहा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के सामने कहा कि हम आपका अभिनंदन करते हैं। क्या यह आवश्यक था? इससे भारत का संदेश क्या बनता है?
पिछले 12 वर्षों से, मोदी सरकार ने पाकिस्तान और ट्रंप की विदेश नीति को लेकर एक अलग छवि प्रस्तुत की है। भक्तों और मीडिया ने पाकिस्तान को कमजोर और भारत को विश्व नेता के रूप में पेश किया। लेकिन क्या इस प्रचार का भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर कोई असर नहीं पड़ा?
इस सप्ताह, ट्रंप ने कहा कि वह भारतीय मीडिया को पसंद करते हैं, जो अच्छे सवाल पूछता है। इसका मतलब है कि भारत का मीडिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोदी मीडिया के रूप में जाना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता इस्लामाबाद में हो चुका है, जिसमें भारत का कोई स्थान नहीं है। भारत बधाई देने वालों की कतार में है। लेकिन उन वरिष्ठ अधिकारियों का क्या, जिन्होंने अपने करियर को भारत को विश्व मंच पर स्थापित करने में बिताया?
पाकिस्तान की स्थिति अभी भी कमजोर है, लेकिन हमने अपनी स्थिति खो दी है। गोदी मीडिया इस बात पर खुश है कि ट्रंप ने कहा कि अगर मोदी रहेंगे और भारत पर हमला होगा, तो वह भारत के साथ खड़े रहेंगे। क्या अंतरराष्ट्रीय संबंध इस तरह से चलते हैं?
ट्रंप के न रहने पर अमेरिका खत्म नहीं होगा। भारत के बारे में ट्रंप ऐसा नहीं कह सकते क्योंकि अमेरिका को भारत के बारे में गलत बोलने का कड़वा अनुभव है।
इंदिरा गांधी का आत्मविश्वास आज भी याद किया जाता है। उन्होंने कहा था कि निक्सन अपने समकक्षों को 'मिस्टर' कहकर संबोधित करते हैं, तो क्या वह हमारे प्रधानमंत्री को भी ऐसा कर सकते हैं? यह उनकी आत्मविश्वास की मिसाल है।
आज भारत की स्थिति ऐसी हो गई है कि गोदी मीडिया को इसकी कोई जानकारी नहीं है। भाजपा में कुछ शिक्षित नेता होंगे, जो समझते होंगे कि ये अंतरराष्ट्रीय समझौते सिविल सर्विस की परीक्षाओं में पढ़ाए जाते हैं।
इस्लामाबाद का नाम पहले आतंकवाद फैलाने के लिए लिया जाता था, लेकिन अब वही अमेरिका हमें कमजोर समझकर कह रहा है कि अगर हमला हुआ तो वह हमारे साथ खड़ा होगा।
मोदी और ट्रंप के रिश्ते अब एक नए मोड़ पर हैं। ट्रंप के प्रिय पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर हैं, जो पहलगाम आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड माने जाते हैं।
