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भारत की नई यूरिया नीति: आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम

केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति 2026 को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य नए यूरिया कारखानों की स्थापना और उत्पादन में वृद्धि करना है। इस नीति के तहत, भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, पिछले वर्षों में उत्पादन में कमी आई है, जिससे सब्सिडी का बोझ भी बढ़ रहा है। सरकार किसानों को संतुलित खाद उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जानें इस नीति के पीछे के आंकड़े और सरकार की योजनाएं।
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नई नीति का उद्देश्य

केंद्र सरकार ने 15 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति 2026 (NIPU-2026) को स्वीकृति दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश में नए यूरिया कारखानों की स्थापना करना और उत्पादन को बढ़ाकर भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन और मांग के बीच का अंतर काफी बड़ा है, जिसके कारण यूरिया का आयात करना पड़ता है।


उत्पादन में कमी

2014 से 2024 के बीच भारत में यूरिया का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन यह मांग को पूरा करने में असफल रहा है। पिछले दो वर्षों में उत्पादन में अचानक गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण कुछ बड़े कारखानों का बंद होना बताया गया है।


आंकड़ों की समीक्षा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 में कुल उत्पादन 225 लाख मीट्रिक टन (LMT) था, जो 2023-24 में बढ़कर 314.07 LMT हो गया। हालांकि, पिछले दो वर्षों में उत्पादन में कमी आई है। 2024-25 में उत्पादन 306.67 LMT और 2025-26 में 293.30 LMT रहा।


सरकार की पहल

सरकार ने 2012 में यूरिया क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति (NIP-2012) लागू की थी, जिसके तहत 6 नए कारखाने स्थापित किए गए। 2014 में इस नीति में संशोधन किया गया ताकि नए निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके। अब, 15 जुलाई 2026 को NIPU-2026 को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य नए गैस आधारित प्लांट स्थापित करना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।


यूरिया सब्सिडी का बोझ

किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए सरकार हर साल भारी सब्सिडी देती है। घरेलू उत्पादन बढ़ने के बावजूद, सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ रहा है। 2025-26 में यूरिया पर 1,42,175.74 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ₹17,856 करोड़ अधिक है।


यूरिया की बढ़ती मांग

भारत में खेती का दायरा बढ़ने के कारण यूरिया की मांग भी बढ़ रही है। सरकार की सब्सिडी के कारण यह अन्य खादों की तुलना में सस्ता है, जिससे किसान इसका अधिक उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, कई किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया का उपयोग कर रहे हैं, जिससे इसकी मांग में वृद्धि हो रही है।


संतुलित खाद उपयोग की आवश्यकता

सरकार किसानों को खाद का संतुलित उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट (INM) को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसान जैविक और रासायनिक खादों का सही मिश्रण करें। इसके साथ ही, नैनो यूरिया को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसके वैज्ञानिक प्रभावों को लेकर अभी भी सवाल उठ रहे हैं।


उत्पादन के आंकड़े

भारत की नई यूरिया नीति: आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम