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भारत की नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई: UAE से लाए गए 13 हजार करोड़ के ड्रग तस्कर

भारत सरकार ने 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले में वांटेड तस्कर वीरेंद्र बसोया को संयुक्त अरब अमीरात से वापस लाने में सफलता हासिल की है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नशे के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति की बड़ी उपलब्धि बताया है। इस कार्रवाई में दोहरी रणनीति अपनाई गई, जिसमें नेटवर्क के मास्टरमाइंड और सहयोगियों की जांच की गई। अब एजेंसियों की नजर वीरेंद्र के बेटे ऋषभ बसोया पर है, जो विदेश में छिपा हुआ है। जानें इस पूरी कहानी में क्या है खास।
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भारत में अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम


नई दिल्ली: भारत सरकार ने विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और मजबूत किया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, जिसमें 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले में वांटेड तस्कर वीरेंद्र सिंह बसोया को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाया गया है।


गृह मंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की सफलता

गृह मंत्री ने बताया 'जीरो टॉलरेंस' की जीत


गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को मोदी सरकार की नशे के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों और उनके नेटवर्क को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। "दुनिया के किसी भी कोने में छिपा अपराधी भारतीय कानून से बच नहीं सकता।"


ड्रग नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति

दोहरी रणनीति से टूटा ड्रग नेटवर्क


बसोया की वापसी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। एजेंसियों ने 'टॉप-टू-बॉटम' और 'बॉटम-टू-टॉप' मॉडल का उपयोग किया। एक ओर, नेटवर्क के मास्टरमाइंड को ट्रैक किया गया, जबकि दूसरी ओर, सहयोगियों और सप्लाई चेन की जांच की गई।


जांच की शुरुआत पुणे पुलिस की 21 फरवरी 2024 की कार्रवाई से हुई, जिसमें दिल्ली में दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीप कुमार राजपाल बसोया को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 970 किलो मेफेड्रोन बरामद हुआ, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत हजारों करोड़ रुपये है।


जांच में यह भी पता चला कि ड्रग्स को सामान्य कंसाइनमेंट के रूप में विदेश भेजने की योजना थी। इसी मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप हनुमानसिंह यादव और मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी गिरफ्तार किया गया।


वीरेंद्र बसोया का कनेक्शन और उसके बेटे पर नजर

13 हजार करोड़ का कनेक्शन और रडार पर बेटा भी


वीरेंद्र बसोया केवल पुणे मामले में ही नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के 13 हजार करोड़ रुपये के ड्रग्स केस में भी वांटेड था। एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी भूतानी और संदीप बसोया, वीरेंद्र के निर्देश पर काम कर रहे थे।


अब एजेंसियों की नजर वीरेंद्र के बेटे ऋषभ बसोया पर है, जिसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है और वह विदेश में छिपा हुआ है। बसोया की वापसी के बाद अब फोकस ऋषभ को भारत लाने पर है।


भारत पोल से तेज हुई कार्रवाई

भारत पोल से तेज हुई कार्रवाई


सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़ों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं। इस नोटिस के माध्यम से किसी भी देश की पुलिस आरोपी को पकड़कर प्रत्यर्पित कर सकती है।


हाल ही में शुरू हुए 'भारत पोल' प्लेटफॉर्म ने कार्य को और तेज कर दिया है। इससे देश की 1400 से अधिक एजेंसियां इंटरपोल से जुड़ गई हैं। पहले सूचना में हफ्तों लगते थे, अब यह 3 से 10 दिन में मिल जाती है।


पिछले कुछ वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़ों की वापसी हुई है। एजेंसियों का मानना है कि वीरेंद्र बसोया की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि अब विदेश भागना अपराधियों के लिए सुरक्षित नहीं रहा।