भारत की यात्रा: नेहरू से मोदी तक का बदलाव
भारत का अतीत और वर्तमान
भारत की यात्रा नेहरू के समय से लेकर अब तक कई बदलाव देखे हैं। पहले भारत गुल्ली डंडा खेलता था, जबकि अब क्रिकेट का सट्टा खेला जाता है। उस समय खेलना एक कर्म था, जबकि अब देखने और लूटने का खेल हो गया है। नेहरू के कार्यकाल में हर कार्य का महत्व था, और वे खुद काम में लिप्त रहते थे। उनके स्टाफ में स्टेनोग्राफर होते थे, जो घंटों डिक्टेशन लेते थे, जिससे योजनाएं और रोडमैप बनते थे।
नेहरू का समय काम का था, और तब सरकारें भी सक्रिय थीं। यह फर्क गुल्ली डंडा खेलने और क्रिकेट देखने के बीच का है। नेहरू के समय भारत खेलता था, पढ़ाई करता था, और असली परीक्षाएं देता था। खेल अकादमियां नेहरू ने ही स्थापित की थीं। उन्होंने स्कूल, अस्पताल और कारखाने खोले।
नेहरू ने किसानों को भूमि बांटी और खेती के लिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाई। उन्होंने हरित क्रांति के लिए अमेरिका और मेक्सिको से बीज मंगवाए। उनके शासन में योजनाओं का निर्माण और उद्घाटन होता था, जिससे भारत का विकास होता था।
तब जीवन जीने के मंदिर बनते थे, न कि परलोक सुधारने के। नेहरू और उनके अनुयायियों ने सच्चाई के कर्म किए। 2014 से पहले का भारत एकजुट था, और लोग मेहनत में लगे रहते थे। उस समय विपक्षी नेता भी निर्भीक थे और नेहरू के सामने अपनी बात रखते थे।
नेहरू ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और भ्रष्टाचार के आरोपों पर बड़े इस्तीफे होते थे। तब विकास दर भी असली थी, और लोग उधारी की जिंदगी नहीं जीते थे। नेहरू ने बुनियादी ढांचे का विकास किया, जिससे लोगों को बिजली, पानी, और स्कूल जैसी सुविधाएं मिलीं।
हालांकि मैं नेहरू के विचारों का आलोचक रहा हूं, लेकिन मैं उनके योगदान को भुला नहीं सकता। भारत की पहचान और उपलब्धियां उनके समय में बनीं, जो आज भी महत्वपूर्ण हैं।
