भारत की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अमेरिका से एआई मॉडल की बातचीत
भारत की डिजिटल सुरक्षा में एआई का योगदान
नई दिल्ली: भारत अपनी महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की साइबर सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अमेरिका के साथ एंथ्रोपिक के उन्नत एआई मॉडल 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच प्राप्त करने के लिए बातचीत कर रहा है। यह जानकारी शुक्रवार को केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री साइबर सिक्योरिटी समिट में बताया कि इस विषय पर अमेरिका के साथ वार्ता चल रही है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को इस उन्नत एआई मॉडल तक पहुंच मिलती है, तो यह अपनी डिजिटल प्रणालियों का परीक्षण अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं के आधार पर कर सकेगा।
उन्होंने कहा, “हम 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच के लिए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। इससे हमें एंथ्रोपिक के एआई सिस्टम की सहायता से अपनी डिजिटल प्रणालियों का गहन परीक्षण करने में मदद मिलेगी।”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत चर्चाओं के परिणाम का इंतजार नहीं कर रहा है और पहले से ही उपलब्ध एआई मॉडलों का उपयोग करके अपने महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम की साइबर सुरक्षा जांच शुरू कर दी है।
उनके अनुसार, लगभग 60 से 70 प्रतिशत साइबर सुरक्षा परीक्षण मौजूदा एआई मॉडलों के माध्यम से किया जा सकता है, जबकि 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच मिलने से परीक्षण की क्षमता और अधिक मजबूत हो जाएगी।
अप्रैल 2026 में एंथ्रोपिक ने 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित बनाना है।
इस प्रोजेक्ट में अमेजन वेब सर्विसेज, एप्पल, ब्रॉडकॉम, सिस्को, क्राउडस्ट्राइक, गूगल, जेपी मॉर्गन चेस, लिनक्स फाउंडेशन, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और पालो अल्टो नेटवर्क्स जैसी प्रमुख टेक कंपनियां शामिल हैं।
इस बीच, एआई की बढ़ती क्षमताओं के कारण साइबर अपराधियों के लिए नए हैकिंग टूल विकसित करना आसान हो रहा है। इसी खतरे को देखते हुए एप्पल अपने सॉफ्टवेयर अपडेट को पहले से अधिक तेजी से जारी कर रही है, ताकि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके।
एस. कृष्णन ने कहा कि जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है, वैसे-वैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में कमजोरियों की पहचान करना भी आसान हो गया है। ऐसे में भारत अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप मजबूत बनाने पर तेजी से काम कर रहा है।
