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भारत-चीन व्यापार संबंधों में सुधार की उम्मीदें: नई चर्चाएं शुरू

भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार की नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद, दोनों देशों के बीच तनाव में कमी आती हुई दिखाई दे रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को सुधारने के लिए बातचीत आरंभ की गई है। इस प्रक्रिया में आगे और बैठकें होने की उम्मीद है। जानें व्यापार घाटे, निर्यात और निवेश के मुद्दों पर क्या कहा गया है।
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भारत और चीन के बीच तनाव में कमी

ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव में कमी आती हुई दिखाई दे रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को जानकारी दी कि भारत और चीन ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में सुधार के लिए बातचीत आरंभ कर दी है। इन चर्चाओं में व्यापार में असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।


आगामी बैठकें और संवाद

आगामी समय में दोनों देशों के बीच और बैठकें होने की संभावना जताई गई है। राजेश अग्रवाल ने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उनके चीनी समकक्ष वांग वेन्ताओ के बीच हाल में हुई बैठक व्यापारिक मुद्दों पर एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने के लिए प्रारंभिक चर्चा थी।


लंबे समय बाद हो रही चर्चाएं

उन्होंने कहा, 'इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में और बैठकें होंगी। ये चर्चाएं लंबे समय के बाद हो रही हैं, इसलिए दोनों पक्षों को अपने मुद्दों के साथ-साथ एक-दूसरे के मुद्दों पर भी विचार करना होगा।' पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही और सीधी उड़ानों में सुधार हुआ है, जो बीजिंग से दिल्ली और ग्वांगझोउ से दिल्ली के बीच संचालित हो रही हैं।


साझा प्रयासों की आवश्यकता

अग्रवाल ने कहा, 'दोनों पक्षों को व्यापार के क्षेत्र में एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही, व्यापार में असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों और आपसी विश्वास को बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।' उनका मानना है कि दोनों पक्ष इन मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं।


व्यापारिक चर्चाओं की शुरुआत

उन्होंने आगे कहा, 'इसलिए यह प्रक्रिया अभी जारी है। व्यापार के मोर्चे पर हमने बातचीत शुरू कर दी है। दोनों पक्ष सकारात्मक रूप से संवाद कर रहे हैं और उन्होंने अपने दृष्टिकोण में खुलापन दिखाया है। हम भी अपने व्यापारिक मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत के लिए तैयार हैं।'


चीन का भारत में व्यापारिक महत्व

12 सितंबर को दोनों मंत्रियों के बीच हुई बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2024-25 में यह 118.39 अरब डॉलर था। भारत का चीन को निर्यात 2025-26 में 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया।


व्यापार घाटा और निवेश के मुद्दे

पिछले वित्त वर्ष में व्यापार घाटा बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 85 अरब डॉलर था। यह भारत के लिए चिंता का विषय है। चीन से निवेश से जुड़े मुद्दे भी हैं, क्योंकि भारत ने उन देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति को कड़ा कर दिया है जिनकी भूमि सीमा भारत से लगती है।


निर्यात में वृद्धि

अप्रैल से अगस्त 2026-27 के दौरान भारत का चीन को निर्यात बढ़कर 9.61 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 6.93 अरब डॉलर था। इसी अवधि में चीन से आयात भी बढ़कर 65.49 अरब डॉलर हो गया। भारत ने जिन प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की है, उनमें इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, पेट्रोलियम उत्पाद, जैविक एवं अजैविक रसायन और लौह अयस्क शामिल हैं।