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भारत-चीन सीमा पर तनाव: ITBP प्रमुख के बयान से राजनीतिक हलचल

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच बढ़ते तनाव ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार चीन की गतिविधियों पर चुप्पी साधे हुए है। कपूर ने सीमा पर जारी टकराव की पुष्टि की और सुरक्षा संसाधनों की कमी पर चिंता जताई। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और कैसे यह राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
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सीमा पर तनाव की बढ़ती चर्चा


अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच बढ़ते तनाव ने देश की राजनीतिक स्थिति को गरमा दिया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के हालिया बयान के बाद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार चीन की गतिविधियों पर चुप्पी साधे हुए है, जबकि सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाएं लगातार हो रही हैं।


ITBP प्रमुख का बयान

शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर में 'हिमवीर सम्मान समारोह' के दौरान कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह स्थिति अभी भी बनी हुई है।


सुरक्षा संसाधनों की आवश्यकता

ITBP प्रमुख ने सीमा सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बल के पास मौजूद कई हथियार लगभग 50 साल पुराने हैं, इसलिए आधुनिकीकरण की आवश्यकता है।


कपूर ने ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि चीन ने अपने सुरक्षा बलों और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में भारी निवेश किया है।


कांग्रेस का आरोप

ITBP प्रमुख के बयान के बाद, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि जुलाई से चीनी सैनिकों के साथ टकराव की खबरें आ रही थीं, लेकिन सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया।


कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार गंभीर स्थिति के बावजूद स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है।


जयराम रमेश के सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ITBP प्रमुख के बयान का स्वागत किया, लेकिन सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हालात गंभीर हैं और सरकार को इस पर स्पष्टता देनी चाहिए।


सीमा विवाद का इतिहास

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। चीन अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिणी तिब्बत' बताता है, जबकि भारत इसे अपने अभिन्न हिस्से के रूप में मानता है।


दोनों देशों के बीच सीमा की लंबाई लगभग 3,500 किलोमीटर है, और यह विवाद कई बार युद्ध का कारण बन चुका है।


अक्साई चिन का विवाद

सीमा विवाद केवल अरुणाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है। लद्दाख से जुड़ा अक्साई चिन भी विवाद का एक प्रमुख केंद्र है। भारत का आरोप है कि चीन ने अक्साई चिन के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है।


राजनीतिक बहस का केंद्र

ITBP प्रमुख के बयान और सीमा पर सैनिकों के आमने-सामने आने के बाद, यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष सरकार से स्पष्टता की मांग कर रहा है, जबकि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हालात पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।