भारत निर्वाचन आयोग का विवादास्पद निर्णय: 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का रहस्य
भारत निर्वाचन आयोग का चौंकाने वाला रुख
नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के तहत देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के मुद्दे पर सियासी विवाद गहरा गया है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत उस सॉफ्टवेयर, ऐप्लिकेशन या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का नाम और वर्जन साझा करने से इनकार कर दिया है, जिसका उपयोग मतदाता सूची में त्रुटियों को पहचानने के लिए किया गया था। आयोग ने कहा कि यह जानकारी 'कमर्शियल कॉन्फिडेंस, ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा (IP)' के दायरे में आती है, इसलिए इसे साझा नहीं किया जा सकता।
सामाजिक कार्यकर्ता का सवाल और आयोग की कानूनी दलीलें
तेलंगाना के सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए थे गंभीर सवाल
यह आरटीआई आवेदन तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम. ए. मुजीब अय्यूब द्वारा दायर किया गया था। उन्होंने आयोग से पूछा कि वोटर डेटा में विसंगतियों को पकड़ने के लिए किस सॉफ्टवेयर या एआई प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया, क्या सिस्टम अपने आप नाम हटाने के लिए फ्लैग करता है, और किसी वैध मतदाता का नाम गलती से न कटे इसके लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं। आयोग ने न केवल सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से मना किया, बल्कि समीक्षा करने वाले अधिकारियों के विवरण पर आरटीआई की धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि इससे संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट किया कि SIR के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा गया है और केवल निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) ही नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार रखते हैं।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त की अपील और पारदर्शिता पर सवाल
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी. रावत ने दी अपील की सलाह
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ओ. पी. रावत ने आयोग के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह एक कानूनी मामला है और आवेदक को आयोग के इस रुख के खिलाफ सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष अपील करनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि चुनाव आयोग जिन सवालों के स्पष्ट उत्तर देने से बच रहा है, उन जानकारियों को अपील के माध्यम से सामने लाना आवश्यक है। पूर्व सीईसी की इस टिप्पणी के बाद चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस और तेज हो गई है।
SIR प्रक्रिया पर उठते सवाल
13 करोड़ नाम कटने और चुनाव आयुक्तों की असहमति से पहले ही घिरी है SIR प्रक्रिया
देशभर में 130 मिलियन (13 करोड़) से अधिक वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर विपक्षी दल और नागरिक संगठन पहले से ही हमलावर हैं। रिपोर्टों में यह सामने आया है कि चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर लिखित असहमति दर्ज कराई थी। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में 'इरोनेट' (ERONET) पोर्टल की तकनीकी खामियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, आयोग का दावा है कि आयोग के भीतर मतभेद सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल से संचालित होते हैं। लेकिन तकनीकी टूल्स की जानकारी छुपाने से आयोग की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
