भारत ने एफसीआरए संशोधन पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को खारिज किया
भारत की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। भारत ने विदेशी चंदे के विनियमन से संबंधित कानून, एफसीआरए में संशोधन पर अमेरिकी सांसद द्वारा की गई टिप्पणी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। भारत ने स्पष्ट किया है कि एफसीआरए में संशोधन का प्रस्ताव पूरी तरह से उसका आंतरिक मामला है और किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने बताया कि कई देशों, जिसमें अमेरिका भी शामिल है, में विदेशी फंड और अंशदान को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं।
अमेरिकी सांसद की टिप्पणी
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सांसद रिले मूर ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की। मूर ने चार अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एफसीआरए संशोधन विधेयक ईसाइयों के खिलाफ एक सीधा हमला है। यह ध्यान देने योग्य है कि एफसीआरए संशोधन विधेयक इस वर्ष बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था और मानसून सत्र में इस पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का उत्तर दे सकते हैं।
मूर ने अपने पोस्ट में लिखा, 'ईसाई धर्म भारत में तब से है जब संत थॉमस मलाबार तट पर आए थे। इसके बावजूद, भारत की संसद एफसीआरए में ऐसे संशोधन पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं पर नियंत्रण प्राप्त हो सकता है। यह ईसाइयों के खिलाफ एक सीधा हमला है।' उन्होंने आगे कहा कि यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
