भारत ने पूर्वी तिमोर के राष्ट्रपति फ्रांसिस्को गुटेरेस के निधन पर शोक व्यक्त किया
भारत का शोक संदेश
नई दिल्ली: भारत ने पूर्वी तिमोर के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसिस्को गुटेरेस ‘लू-ओलो’ के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि गुटेरेस को दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा।
शोक व्यक्त करने की प्रक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पूर्वी मामलों के सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने नई दिल्ली में पूर्वी तिमोर के दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने दिवंगत राष्ट्रपति के परिवार, सरकार और जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की। डॉ. गुटेरेस को भारत और तिमोर-लेस्ते के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
गुटेरेस का जीवन और योगदान
गुटेरेस ‘लू-ओलो’ (71) का निधन रविवार को मलेशिया के एक अस्पताल में हुआ, जहां वे उपचाराधीन थे। तिमोर-लेस्ते की न्यूज एजेंसी टाटोली ने इसकी पुष्टि की। उनके परिवार ने इसे उनकी पत्नी, बच्चों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए एक “गहरी क्षति” बताया।
गुटेरेस ने 1974 में राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन में भाग लिया और इंडोनेशियाई कब्जे का विरोध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1998 में, वे फ्रेटिलिन सशस्त्र संघर्ष से उपजी राजनीतिक पार्टी के प्रमुख बने।
फ्रेटिलिन की स्थापना 1974 में हुई थी, और इस पार्टी ने 28 नवंबर 1975 को पुर्तगाल से पूर्वी तिमोर की स्वतंत्रता का एकतरफा ऐलान किया। इसके तुरंत बाद, इंडोनेशिया ने पूर्वी तिमोर पर आक्रमण किया, जिसके बाद फ्रेटिलिन ने एक लंबा और खूनी सशस्त्र संघर्ष शुरू किया।
तिमोर-लेस्ते के स्वतंत्रता जनमत संग्रह के बाद, गुटेरेस 2021 में संविधान सभा के अध्यक्ष बने। उन्होंने 2022 में तिमोर-लेस्ते की स्वतंत्रता की पुनर्स्थापना की घोषणा की। वे 2002 से 2007 तक संसद के अध्यक्ष रहे और 2017 से 2022 तक देश के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।
