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भारत ने म्यांमार में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने वाले विदेशी नागरिकों को छोड़ा

भारत ने म्यांमार में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को रिहा कर दिया है। हालांकि, उन्हें एक महीने के भीतर भारत लौटने का आदेश दिया गया है। इस मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी दबाव के कारण राहत मिली है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और क्या हैं इसके संभावित प्रभाव।
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भारत ने विदेशी नागरिकों को दी रिहाई


नई दिल्ली। भारत ने म्यांमार में आतंकवादियों को हथियार और ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों को रिहा कर दिया है। इन सभी को अपने देश लौटने की अनुमति दी गई है, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें एक महीने के भीतर भारत वापस आना होगा। एनआईए ने कहा कि जांच अभी भी जारी है और इनकी भारत में मौजूदगी की आवश्यकता नहीं है।


अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को मार्च 2026 में म्यांमार के प्रशिक्षण शिविर में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये सभी भारत से मलेशिया भागने की योजना बना रहे थे। इनकी गिरफ्तारी कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली से हुई थी, और यह भी कहा गया कि रूस ने भारत को इनके बारे में सूचित किया था।


कोर्ट ने विदेशी नागरिकों को उनके परिवार से मिलने का संवैधानिक अधिकार दिया है। उन्हें जमानती बॉंड भरने की आवश्यकता होगी और एक महीने बाद भारत लौटकर कोर्ट को जानकारी देनी होगी। इस मामले पर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी दबाव के चलते वैन डाइक को राहत मिली है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन हुआ है। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि इन नागरिकों को भारत का वीजा कैसे मिला और वे भारत के रास्ते म्यांमार कैसे पहुंचे।


एनआईए ने इन सभी विदेशी नागरिकों को मार्च 2026 में रूस से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तार किया था। ये लोग पहले भी भारत में प्रशिक्षण देने आ चुके थे और इस बार गुवाहाटी पहुंचे थे, फिर मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया। इन गंभीर आरोपों के बावजूद इनकी रिहाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।