भारत ने लद्दाख में 28 रणनीतिक स्थानों को आधिकारिक नक्शे में शामिल किया
लद्दाख में सीमा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के बाद, केंद्र सरकार ने लद्दाख में भी सीमा सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे चीन की चिंता बढ़ने की संभावना है। गृह मंत्रालय ने लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद 28 रणनीतिक स्थानों, चोटियों, दर्रों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर दर्ज कर नया नक्शा जारी किया है। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं, जो 2020 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव का केंद्र बने थे।
आधिकारिक नक्शे का उद्देश्य
आधिकारिक नक्शा-निर्माण और सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य
गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार ने लद्दाख प्रशासन के सहयोग से भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक नक्शे पर इन 28 स्थलों को उनके मानक नामों के साथ मान्यता दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आधिकारिक मानचित्रण को व्यवस्थित करना, सामरिक क्षेत्रों की सटीक पहचान सुनिश्चित करना और सीमावर्ती इलाकों में जागरूकता बढ़ाना है। इससे पहले, अगस्त में, गृह मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के 27 प्रमुख स्थलों का मानकीकरण किया था, जिस पर चीन ने आपत्ति जताई थी।
गोगरा और हॉट स्प्रिंग सहित महत्वपूर्ण स्थान
गोगरा, हॉट स्प्रिंग, जोरावर चोटी सहित इन 28 रणनीतिक स्थलों को मिली जगह
सूची में गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे स्थान शामिल हैं, जो भारतीय गश्ती दलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 5 मई 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा था। अन्य स्थानों में अलीशा गिरी, ब्रांगसा, चैपचिंगल दर्रा, कनिष्क चोटी, करुण पीर पर्वत, कुकसेल, मार्तंड गिरी, पारपिक ग्लेशियर, स्कमरी ग्लेशियर, शचमिरिक दर्रा, श्कोर्गा घाटी, जोरावर चोटी, देहरा कंपास और द्रक कार्पो शामिल हैं।
चीन की आक्रामकता का जवाब
चीन की 'कार्टोग्राफिक आक्रामकता' को भारत का कड़ा जवाब
भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है जब बीजिंग भारतीय क्षेत्रों पर फर्जी दावे करने के लिए मंदारिन नामों का उपयोग कर रहा था। चीन इन भारतीय भूभागों को तिब्बत का हिस्सा बताकर इतिहास को मनगढ़ंत तरीके से पेश करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन पहले भी तिब्बत और पूर्वी तुर्कमेनिस्तान के नाम बदल चुका है। भारत द्वारा लद्दाख के इन क्षेत्रों की विधिवत पहचान दर्ज करने से बीजिंग के क्षेत्रीय दावों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चुनौती मिली है।
