भारत ने शिनजियांग एयरस्पेस के माध्यम से यूरोप और अमेरिका के लिए उड़ानों का नया मार्ग खोजा
एयर इंडिया का शिनजियांग एयर कॉरिडोर के लिए प्रयास
पाकिस्तान द्वारा एयरस्पेस पर लगाए गए प्रतिबंध के चलते, भारतीय एयरलाइंस को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए लंबी दूरी की उड़ानों के लिए नए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ रहा है। इस स्थिति में, भारत चीन के शिनजियांग एयरस्पेस के माध्यम से एक वैकल्पिक हवाई कॉरिडोर की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। यदि चीन इस मार्ग को स्वीकृति देता है, तो भारतीय उड़ानों को कम समय और ईंधन खर्च करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह अभी भी एक प्रस्तावित योजना है और चीन की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
एयर इंडिया ने सरकार से उठाया मुद्दा
एक रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह चीन के साथ बातचीत कर शिनजियांग के ऊपर से वैकल्पिक हवाई मार्ग प्राप्त करने का प्रयास करे। एयरलाइन ने विशेष रूप से हॉटन, काशगर और उरुमकी जैसे क्षेत्रों में संभावित डायवर्जन विकल्पों पर विचार करने का आग्रह किया है। एयर इंडिया के एक दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध से उसकी सालाना प्री-टैक्स कमाई पर लगभग 455 मिलियन डॉलर का प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, कुछ लंबी दूरी की उड़ानों में ईंधन खर्च में 29 प्रतिशत तक की वृद्धि और यात्रा समय में तीन घंटे तक की बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है।
शिनजियांग एयरस्पेस का महत्व
भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए उड़ानों के लिए पाकिस्तान के ऊपर से गुजरने वाला मार्ग भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। पाकिस्तान द्वारा एयरस्पेस के उपयोग पर रोक के कारण, भारतीय विमानन कंपनियों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। पाकिस्तान ने सितंबर 2026 में भारतीय विमानों पर एयरस्पेस के उपयोग की पाबंदी को फिर से बढ़ा दिया है। नए NOTAM के अनुसार, यह प्रतिबंध 24 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा और भारतीय रजिस्टर्ड विमानों के साथ-साथ भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित विमानों पर भी लागू होगा।
चीन से अनुमति प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण
हालांकि शिनजियांग के रास्ते उड़ान भरने का विचार आकर्षक है, लेकिन इसके सामने कई व्यावहारिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां हैं। जिस एयरस्पेस का उपयोग करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, वह कुछ हिस्सों में चीन के सैन्य नियंत्रण वाले क्षेत्र से जुड़ा है। क्षेत्र का ऊँचा भूभाग, सैन्य गतिविधियाँ और आपात स्थिति में वैकल्पिक एयरपोर्ट की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, भारत की ओर से अनुरोध या बातचीत का मतलब यह नहीं है कि भारतीय एयरलाइंस को तुरंत इस कॉरिडोर पर उड़ान की अनुमति मिल जाएगी। किसी भी नए रूट के लिए चीन की संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी आवश्यक होगी।
भारत-चीन के बीच बढ़ती कनेक्टिविटी
यह संभावित एयर कॉरिडोर की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क धीरे-धीरे बहाल हो रहा है। एयर इंडिया ने 1 फरवरी 2026 से दिल्ली-शंघाई के लिए नॉन-स्टॉप उड़ानें फिर से शुरू की हैं। एयरलाइन के अनुसार, यह सेवा लगभग छह साल के अंतराल के बाद बहाल हुई है और प्रारंभ में इसे सप्ताह में चार बार संचालित किया जाएगा। भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों की बहाली को हालिया कूटनीतिक संपर्कों के बाद सामान्य संबंधों की दिशा में उठाए गए कदमों में से एक माना जा रहा है।
