भारत ने होर्मुज संकट के बीच जहाजों और नाविकों की सुरक्षा बढ़ाई
भारत की निगरानी प्रणाली
भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच फारस की खाड़ी में अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस क्षेत्र में छह भारतीय-ध्वज वाले कार्गो जहाज मौजूद हैं, और लगभग 4500 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। सरकार इनकी सुरक्षा पर लगातार नजर रख रही है।
फारस की खाड़ी में भारतीय जहाज
फारस की खाड़ी में भारत के रजिस्टर्ड छह कार्गो जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में स्थित हैं। इसके अलावा, भारतीय हितों से जुड़े विदेशी झंडे वाले जहाज भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं। सरकार ने इन जहाजों की स्थिति और उनकी गतिविधियों की निगरानी को प्राथमिकता दी है। इस साल पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद, भारत ने भारतीय-ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को भी अपनी रणनीति में शामिल किया है।
Seafarer-First प्रणाली का कार्यान्वयन
पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए Seafarer-First फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में जहाजों की रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। सरकार ने 24 घंटे कंट्रोल रूम और डीजी कम्युनिकेशन सेंटर के माध्यम से जहाजों की स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था की है।
सुरक्षा में बढ़ती चिंताएँ
होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वाणिज्यिक जहाजों पर भी पड़ा है। जुलाई में दो मर्चेंट जहाजों पर हमलों के बाद, सरकार ने विशेष सुरक्षा उपाय लागू किए थे। पत्तन मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए थे। इससे पहले अप्रैल में भी इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों वाले विदेशी-ध्वज जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं हुई थीं।
