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भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर बढ़ा विवाद

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। भारत ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को मानने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान ने रचनात्मक बातचीत की अपील की है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
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भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि का विवाद

इस्लामाबाद- सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। भारत ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के निर्णय को मानने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान ने नई दिल्ली से 1960 की सिंधु जल संधि के तहत 'रचनात्मक' बातचीत करने की मांग की है।


पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बुधवार को कहा कि स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि लागू है और यह दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान इस निर्णय को लागू कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।


संधि की भावना के अनुरूप बातचीत पर जोर


समाचार मीडिया के अनुसार, अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि की भाषा, प्रावधानों और भावना के अनुसार इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत से भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ने और संधि के कानूनी प्रावधानों का पालन करने की अपील की।


पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों को संधि के प्रावधानों के तहत विवादों का समाधान निकालने के लिए रचनात्मक तरीके से बातचीत करनी चाहिए।


भारत पहले ही फैसले को खारिज कर चुका है


भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान ने मार्च 2026 में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का रुख किया था। पाकिस्तान ने न्यायालय से संधि की मौजूदा स्थिति और उसके प्रावधानों पर निर्णय देने का अनुरोध किया था।


हालांकि, भारत ने सोमवार को ट्रिब्यूनल के निर्णय को पूरी तरह से खारिज कर दिया। भारत ने न केवल इस निर्णय को मानने से इनकार किया, बल्कि ट्रिब्यूनल की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए उसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से बातचीत और संधि को लागू रखने की अपील की गई है।