भारत में कई व्हिस्की और रम ब्रांड पर FSSAI की रोक
FSSAI द्वारा बिक्री पर रोक
भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक, FSSAI, ने विभिन्न भारतीय व्हिस्की और रम ब्रांड की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इन उत्पादों में फ्लेवरिंग के लिए अपनाए गए तरीके मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
प्रभावित ब्रांड और कंपनियाँ
FSSAI ने बताया कि जिन उत्पादों पर यह रोक लगाई गई है, उनमें डियाजियो इंडिया की यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू बेवरेजेज और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर शामिल हैं। इन कंपनियों ने स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए कृत्रिम फ्लेवर का उपयोग किया।
शराब बाजार पर असर
सरकार की इस कार्रवाई से भारत के शराब बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित हो सकता है, खासकर उन उपभोक्ताओं पर जो देश में निर्मित शराब का सेवन करते हैं। भारत में बनी व्हिस्की और रम आमतौर पर आयातित विकल्पों की तुलना में सस्ती होती हैं।
भारत का शराब बाजार
भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक है, जहाँ सालाना राजस्व लगभग 40 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। डियाजियो देश की सबसे बड़ी शराब कंपनी बनी हुई है, जो मार्केट शेयर के मामले में अग्रणी है।
FSSAI के सवाल
FSSAI ने फ्लेवरिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार, अल्कोहलिक पेय में केवल प्राकृतिक स्वाद वाले तत्वों का उपयोग किया जा सकता है। हालाँकि, डियाजियो और इनब्रू की फैक्ट्रियों में किए गए परीक्षणों में पाया गया कि उत्पादन के दौरान शराब की श्रेणी से मेल खाते फ्लेवर का मिश्रण किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय मानक
रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने एक बयान में कहा, 'कोई भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त निर्माण प्रक्रिया नहीं है, जिसमें रम में रम फ्लेवर या व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर मिलाया जाता हो।' इसने यह भी कहा कि ऐसे तरीकों से सही परिपक्वता की आवश्यकता समाप्त हो सकती है और पारंपरिक सामग्री जैसे मोलासेस, माल्ट और अंगूर पर निर्भरता कम हो सकती है।
