Newzfatafatlogo

भारत में खाद्य महंगाई की बढ़ती आशंका: जेपी मॉर्गन की चेतावनी

जेपी मॉर्गन ने भविष्यवाणी की है कि 2027 में भारत सहित वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सुपर अल नीनो, ईरान-अमेरिका संघर्ष और महंगी खाद के कारण कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत में रासायनिक खाद की महंगाई और सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की आशंका है। जानें इस रिपोर्ट के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 | 

महंगाई की भविष्यवाणी


नई दिल्ली। विश्व की प्रमुख वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन ने अनुमान लगाया है कि 2027 में भारत समेत वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में काफी वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सुपर अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर हो सकता है, साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि और महंगी खाद के चलते कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2027 की पहली छमाही में खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगभग पांच प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जबकि 2026 की पहली छमाही में यह आंकड़ा 2.8 प्रतिशत था। भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में रासायनिक खाद पहले से ही महंगी है। रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई के बढ़ने से भारत सरकार पर तीन लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।


वास्तव में, वैश्विक स्तर पर 42 प्रतिशत यूरिया और 27 प्रतिशत अमोनिया पश्चिम एशिया के देशों से आयात किया जाता है। वहां 28 फरवरी से युद्ध चल रहा है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और होर्मुज की खाड़ी का मुख्य समुद्री मार्ग बंद हो गया है। इस स्थिति के कारण खाद की भारी कमी हो सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं। गैस की महंगाई के कारण खाद का उत्पादन भी महंगा हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में गैस संयंत्र ठप हो गए हैं या उत्पादन में कमी आई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसे सामान्य होने में एक से पांच साल लग सकते हैं।