भारत में खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर, कमजोर मानसून का असर
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता
नई दिल्ली: भारत में मानसून की कमजोरी के बावजूद खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में खाने-पीने की चीजों की महंगाई काबू में है। साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों के अनुसार, सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत और अंडों की कीमतों में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि अनाज की कीमतों में 0.5 प्रतिशत और तेल व फैट की कीमतों में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
सालाना आधार पर, तेल और फैट की कीमतों में 11 प्रतिशत, अंडों में 6 प्रतिशत, सब्जियों में 3 प्रतिशत, दूध में 3 प्रतिशत, मसालों में 3 प्रतिशत, अनाज में 2 प्रतिशत और दालों में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख खाद्य उत्पादक राज्यों में मानसून की कमी से आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति पर खतरा उत्पन्न हो सकता है, जिससे कीमतों में वृद्धि का दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 3 जुलाई तक कुल बारिश लंबे समय के औसत से 31 प्रतिशत कम रही।
जून में बारिश का स्तर पिछले दशक में सबसे खराब रहा, जो लंबे समय के औसत से 40 प्रतिशत कम था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बुवाई का कार्य कम हो गया है, क्योंकि मानसून कमजोर बना हुआ है, जिससे जलाशयों में पानी का स्तर बहुत कम हो गया है।
देशभर में जलाशयों का जलस्तर उनकी क्षमता का केवल 26 प्रतिशत है, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में 39 प्रतिशत कम है।
मध्य भारत में जलस्तर सबसे अधिक (32 प्रतिशत) है, इसके बाद उत्तर भारत (29 प्रतिशत) और पश्चिम भारत (28 प्रतिशत) का स्थान है। दक्षिण भारत (20 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (19 प्रतिशत) में जलस्तर काफी कम है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग को उम्मीद है कि जुलाई 2026 में बारिश सामान्य से कम होगी, जिससे मानसून और खरीफ की बुवाई के मौसम को लेकर चिंता बनी रहेगी।
