भारत में खाद्य सुरक्षा: मिलावट और जांच में कमी की चुनौतियाँ
खाद्य सुरक्षा में मिलावट की समस्या
दूध, पनीर, मसाले, मिठाई, तेल और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में मिलावट की घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) इस मामले में नियमों को सख्त कर रहा है और जांच की संख्या में वृद्धि कर रहा है। फिर भी, मिलावट और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के मामले पूरी तरह से समाप्त नहीं हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लगभग 30 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब जांच करने वाले अधिकारी ही कम हैं, तो मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी रोक कैसे लगाई जा सकेगी।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कमी
सरकार ने लोकसभा में बताया कि देश में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 4,208 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल 2,997 कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि 1,211 पद खाली हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का लगभग 28.8 प्रतिशत है। इसके अलावा, 718 नामित अधिकारियों में से 668 कार्यरत हैं, जबकि 50 पद अभी भी खाली हैं। ऐसे में, यदि जांच करने वाले अधिकारियों की संख्या कम होगी, तो नियमित जांच करना और नियमों का पालन कराना मुश्किल हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा के नियम तभी प्रभावी होंगे जब पर्याप्त प्रशिक्षित अधिकारी मौजूद हों।
खाद्य कारोबार की बढ़ती संख्या और निगरानी की चुनौतियाँ
FSSAI देशभर में खाद्य सुरक्षा की देखरेख करती है। यह सुनिश्चित करती है कि बाजार में बिकने वाला खाना सुरक्षित हो और उस पर सही जानकारी हो। हालांकि, इसके क्षेत्रीय कार्यालयों की संख्या कम है। यदि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या कम होगी, तो मिलावट करने वालों पर नजर रखना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। सरकार ने स्वीकार किया है कि खाद्य कारोबार की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते राज्यों से खाली पद भरने और नए पद बनाने का आग्रह किया गया है।
FSSAI की पहलें
FSSAI ने जांच और प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाई है। वर्तमान में, देश में 252 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएँ, 24 अपील के लिए रेफरल लैब और 305 मोबाइल लैब गाड़ियाँ हैं। नए नियमों में साफ और सही लेबल लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, रोजाना 50 लीटर से अधिक तेल में तलने वाली दुकानों को इस्तेमाल किए गए तेल का रिकॉर्ड रखना आवश्यक है।
आंकड़ों का विश्लेषण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में हर साल लगभग 1.7 लाख खाद्य नमूनों की जांच की गई। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने के मामलों में वृद्धि हुई है। 2022-23 में 28,464 सिविल केस दर्ज किए गए, जो 2024-25 में बढ़कर 30,142 हो गए। हालांकि, लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई में कमी आई है, जो 533 से घटकर 220 रह गई। यह दर्शाता है कि जांच और कार्रवाई जारी है, लेकिन सख्त कार्रवाई अपेक्षाकृत कम हुई है।
