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भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण में वृद्धि: 2024 की रिपोर्ट

भारत में 2024 में जन्म और मृत्यु पंजीकरण के आंकड़े में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जन्म पंजीकरण 99.1% और मृत्यु पंजीकरण 99.4% तक पहुंच गया है। शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है, और अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। जानें इस डेटा का सरकार के लिए क्या महत्व है और कैसे यह योजनाओं को प्रभावित करता है।
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भारत में जन्म और मृत्यु के आंकड़े

भारत में 2024 में 2.5 करोड़ (2,54,73,389) बच्चों का जन्म पंजीकरण हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसी समय, 89.3 लाख (89,38,301) लोगों की मृत्यु भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई। ये आंकड़े रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) द्वारा जारी सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) 2024 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। जुलाई 2026 में प्रकाशित इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि देश में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण किस स्तर पर हो रहा है।


पंजीकरण के आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में लगभग हर 100 में से 99 बच्चों का जन्म पंजीकृत किया गया, जिससे जन्म पंजीकरण का आंकड़ा 99.1% तक पहुंच गया। इसी तरह, हर 100 में से लगभग 99 मौतों का भी रिकॉर्ड दर्ज हुआ, जिससे मृत्यु पंजीकरण 99.4% पर पहुंच गया। यह अब तक के सबसे अच्छे स्तरों में से एक माना जा रहा है। देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जन्म पंजीकरण 100% रहा, जबकि 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मृत्यु पंजीकरण में भी 100% का आंकड़ा हासिल किया।


रिपोर्ट में प्रमुख निष्कर्ष

CRS रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। 2023 में 1,45,992 नवजात बच्चों की मृत्यु हुई थी, जो 2024 में घटकर 1,20,992 रह गई। इसके अलावा, स्टिल बर्थ के मामलों में भी गिरावट देखी गई है। 2023 में यह आंकड़ा लगभग 1.01 लाख था, जो 2024 में घटकर 81,117 रह गया।


रिपोर्ट में जन्म के समय लिंगानुपात के आंकड़े भी शामिल हैं। देश में हर 1,000 लड़कों पर 933 लड़कियों का जन्म हुआ। अरुणाचल प्रदेश में यह अनुपात सबसे अच्छा रहा, जहां हर 1,000 लड़कों पर 1,050 लड़कियों का जन्म हुआ। वहीं, नागालैंड में यह अनुपात सबसे खराब रहा, जहां हर 1,000 लड़कों पर केवल 806 लड़कियां पैदा हुईं।


रिपोर्ट के अनुसार, कुल जन्मों में 57.1% बच्चे शहरी क्षेत्रों में और 42.9% ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा हुए। यह भी उल्लेखनीय है कि लगभग 79.4% बच्चों का जन्म अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हुआ, जो दर्शाता है कि अब अधिक महिलाएं अस्पताल में प्रसव करवा रही हैं।


सरकार के लिए डेटा का महत्व

आप सोच रहे होंगे कि इतने सारे बच्चों के जन्म और इस डेटा से सरकार को क्या लाभ होता है। वास्तव में, यह डेटा सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है:



  • योजनाएं बनाने में सहायक: इस डेटा की मदद से सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि भविष्य में कितने स्कूलों, अस्पतालों और नौकरियों की आवश्यकता होगी।

  • सटीक बजट और सुविधाएं: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालयों को यह जानने में मदद मिलती है कि मां और बच्चे के पोषण के लिए चल रही योजनाएं कितनी सफल हैं।

  • स्थानीय विकास: जिला स्तर और ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र की जनसंख्या का सटीक आंकड़ा मिलता है, जिससे वे बुनियादी सुविधाओं की योजना बेहतर तरीके से बना सकते हैं।

  • घोटाले और फर्जीवाड़े पर नियंत्रण: नए संशोधन के बाद बने राष्ट्रीय और राज्य डेटाबेस से सरकारी रिकॉर्ड्स को तुरंत अपडेट किया जा सकता है, जिससे योजनाओं का लाभ सही हकदारों तक बिना किसी देरी और भ्रष्टाचार के पहुंचाया जा सकता है।