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भारत में तपेदिक: स्थिति, प्रयास और चुनौतियाँ

भारत में तपेदिक (TB) के मामलों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है, और सरकारी प्रयासों के बावजूद इस बीमारी से मुक्ति नहीं मिल पाई है। 2014 की तुलना में TB संक्रमण के मामलों में कमी आई है, लेकिन राष्ट्रीय मृत्यु दर चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी अस्पतालों में TB के लिए विशेष विभाग और जागरूकता अभियानों के बावजूद, गरीबी और कुपोषण जैसी समस्याएँ टीबी मुक्त भारत की राह में बाधा बनी हुई हैं। जानें इस विषय पर और क्या किया जा रहा है और क्या सुधार संभव है।
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भारत में तपेदिक: स्थिति, प्रयास और चुनौतियाँ

भारत में तपेदिक का संकट

भारत में तपेदिक (TB) के मामले विश्व में सबसे अधिक हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ट्यूबरकुलोसिस संक्रमण के मामलों में 25 से 27 प्रतिशत मरीज भारत से हैं। देश में होने वाली कुल मौतों में से 2.6 प्रतिशत मौतें आज भी TB के कारण होती हैं। केंद्र सरकार ने 9 सितंबर 2022 को 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान' की शुरुआत की थी, लेकिन अभी तक TB संक्रमण से मुक्ति नहीं मिल पाई है.


सरकारी प्रयासों की स्थिति

हालांकि राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सरकारी प्रयास सफल हो रहे हैं, लेकिन भारत अभी भी पोलियो की तरह टीबी मुक्त नहीं हो पाया है। राष्ट्रीय स्तर पर TB के मामलों में 2014 की तुलना में कमी आई है, लेकिन व्यापक सुधार की आवश्यकता है। आंकड़ों में राहत दिख रही है, लेकिन राष्ट्रीय मृत्यु दर चिंता का विषय बनी हुई है.


आंकड़ों का विश्लेषण

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 की तुलना में TB संक्रमण के मामलों में कमी आई है। 2014 में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 243 लोग TB से संक्रमित थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 187 हो गई है। TB से होने वाली मौतों की संख्या भी कम हुई है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक है.


सरकार के कदम

दिसंबर 2024 तक, 28.1 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। TB के फैलाव को रोकने के लिए 20 लाख लोगों का इलाज किया गया है। 5.7 लाख नए निक्षय मित्रों को शामिल किया गया है, जिनका कार्य TB के प्रति जागरूकता फैलाना है.


भारत में टीबी मुक्त होने में बाधाएँ

डॉ. शाहिद अख्तर, जो सरकारी TB विभाग में कार्यरत रहे हैं, बताते हैं कि गरीबी, कुपोषण, भीड़भाड़ वाली बस्तियाँ, और दवा-प्रतिरोधी TB जैसी समस्याएँ भारत के लिए टीबी मुक्त होने में सबसे बड़ी बाधाएँ हैं.


क्या सुधार संभव है?

डॉ. शाहिद का मानना है कि भारत में TB का सबसे अच्छा इलाज सरकारी संस्थानों में उपलब्ध है। सरकारी अस्पतालों में TB के लिए विशेष विभाग होते हैं, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स की मदद से बेहतर इलाज किया जाता है.