भारत में निकोटिन पाउच की बिक्री पर कानूनी रोक: बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की रील्स और कॉलेज कैंपस के कैफे में आजकल एक नया उत्पाद, निकोटिन पाउच, युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ये छोटे पाउच मिंट, सिट्रस और बेरी जैसे विभिन्न स्वादों में उपलब्ध हैं और इन्हें मसूड़ों के बीच रखा जाता है। इनसे निकलने वाला निकोटिन सीधे मसूड़ों के माध्यम से रक्त में प्रवेश करता है। सिगरेट के धुएं की अनुपस्थिति, बदबू न होने और उपयोग में सरलता के कारण इसे 'स्मार्ट और सुरक्षित' जीवनशैली उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। लेकिन क्या भारत में इसे इस तरह बेचना कानूनी है?
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि स्मोक फ्री उत्पादों को कानूनी छूट नहीं मिलती। कोर्ट ने कहा है कि एयरपोर्ट्स के इंटरनेशनल डिपार्चर एरिया में स्थित ड्यूटी-फ्री स्टोर्स भारत की सीमा के भीतर आते हैं, इसलिए वहां बिकने वाले उत्पादों पर देश के सभी नियम लागू होंगे।
अडानी ग्रुप को झटका
इस फैसले से अडानी ग्रुप को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उनकी मुंबई एयरपोर्ट पर स्थित ड्यूटी-फ्री दुकान पर निकोटिन पाउच बेचे जा रहे थे। भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस पर रोक लगा दी, यह कहते हुए कि यह दवा कानूनों का उल्लंघन है और इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा है। अडानी ग्रुप ने कोर्ट में तर्क दिया कि कस्टम बैरियर के पार की दुकानें भारतीय कानून के दायरे से बाहर हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
भारत का कानूनी दृष्टिकोण
भारत में निकोटिन पाउच की बिक्री के संबंध में कानून स्पष्ट है। इन्हें बिना सरकारी मंजूरी और दवा लाइसेंस के बेचना पूरी तरह से अवैध है। ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के तहत, निकोटिन को नियंत्रित केमिकल माना जाता है और इसका उपयोग केवल निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) के तहत किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
बिना सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की मंजूरी के निकोटिन युक्त पाउच बेचना कानून का उल्लंघन है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन पाउच में निकोटिन की मात्रा अधिक होती है, जो युवाओं को इसकी लत लगवा सकती है।
भ्रामक प्रचार
निकोटिन पाउच को सिगरेट की लत छुड़ाने के उपाय के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है, जो एक भ्रामक तथ्य है। ये पाउच विदेशों में आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन भारत में इन्हें बिना किसी नियामक संस्था के निर्देश के बेचा जा रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि निकोटिन पाउच दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन भारत में इन्हें बिना मंजूरी बेचना अवैध है। इस प्रकार, कोर्ट के इस निर्णय का प्रभाव देशभर में महसूस किया जाएगा।
