भारत में प्लास्टिक बैंकनोट: इतिहास और वैश्विक उपयोग
प्लास्टिक बैंकनोट की प्रक्रिया में तेजी
भारत में प्लास्टिक बैंकनोट लाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब देश में ऐसे नोटों को लाने का प्रयास किया गया है। पहले भी कई बार इन नोटों को चलाने की कोशिश की गई, लेकिन विभिन्न कारणों से ये सफल नहीं हो सके। इस लेख में हम प्लास्टिक नोट के इतिहास और भूगोल पर चर्चा करेंगे।
प्लास्टिक बैंकनोट क्या हैं?
प्लास्टिक बैंकनोट, जिसे आधिकारिक रूप से पॉलिमर बैंकनोट कहा जाता है, पतले और लचीले प्लास्टिक से बने होते हैं। ये कागज के नोटों की तरह मोड़े जा सकते हैं, लेकिन क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कठोर नहीं होते।
प्लास्टिक बैंकनोट के लाभ
प्लास्टिक बैंकनोट अधिक टिकाऊ होते हैं और कागज के नोटों की तुलना में लंबे समय तक चलते हैं। ये धूल, नमी और मुड़ने के प्रभाव से कम प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, इनकी नकल करना मुश्किल होता है, क्योंकि इनमें सुरक्षा फीचर्स जैसे माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और सी-थ्रू विंडो शामिल होते हैं।
आरबीआई का प्लास्टिक बैंकनोट पर ध्यान
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लंबे समय से प्लास्टिक बैंकनोट लाने की योजना बना रहा है। हाल के वर्षों में करेंसी की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे प्रिंटिंग की लागत भी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025 में करेंसी प्रिंटिंग की लागत 6,372.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
भारत में पहले क्यों नहीं लाए गए?
2012 में, केंद्र सरकार ने कुछ शहरों में 10 रुपये के पॉलिमर नोटों के परीक्षण की अनुमति दी थी, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह सफल नहीं हो सका। एटीएम में इन नोटों की पहचान करना सबसे बड़ी समस्या थी।
क्या कागजी मुद्रा समाप्त होगी?
आरबीआई पॉलिमर नोटों को लाने पर विचार कर रहा है, लेकिन सभी नोटों को एक साथ नहीं बदला जाएगा। पहले 10 रुपये और 20 रुपये के नोटों का परीक्षण किया जाएगा।
प्लास्टिक नोट किन देशों में प्रचलित हैं?
दुनिया भर में 60 से अधिक देशों में प्लास्टिक बैंकनोट प्रचलित हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पहले पॉलिमर बैंकनोट जारी किया था, इसके बाद कई अन्य देशों ने भी इन्हें अपनाया।
