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भारत में भू-तापीय ऊर्जा का विकास: नई संभावनाएं और परियोजनाएं

भारत अब भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग कर 24 घंटे बिजली उत्पादन की दिशा में काम कर रहा है। लद्दाख की पूगा घाटी में पहले दो जियोथर्मल कुएं स्थापित किए गए हैं। इस नई तकनीक से न केवल बिजली उत्पादन होगा, बल्कि इमारतों को ठंडा और गर्म रखने के लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जानें इस दिशा में भारत की योजनाएं और संभावनाएं।
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भू-तापीय ऊर्जा का महत्व

क्या आपने कभी सोचा है कि जब तेल और गैस के कुएं सूख जाते हैं, तो उनका क्या होता है? इन कुओं को बंद करने या भरने में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी खतरा बना रहता है। भारत अब इन रद्द पड़े कुओं में नई संभावनाएं खोजने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग कर 24 घंटे बिजली उत्पादन की योजना बना रहा है.


जियोथर्मल एनर्जी का उपयोग

भारत जियोथर्मल ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन और एयर कंडीशनिंग के लिए करेगा। देश में लगभग 10,600 मेगावाट की भू-तापीय ऊर्जा क्षमता है। लद्दाख की पूगा घाटी में देश के पहले दो जियोथर्मल कुओं की शुरुआत के साथ, भारत इस दिशा में ठोस कदम उठा रहा है.


भू-तापीय ऊर्जा के लिए नई तकनीक

एक पायलट रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत 'बोरहोल हीट एक्सचेंजर्स' तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे इमारतों को ठंडा और गर्म रखने के लिए सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं. यह तकनीक जमीन के नीचे की स्थिर गर्मी या ठंड का उपयोग करती है.


भारत की जियोथर्मल नीति

सरकार ने सितंबर 2025 में जियोथर्मल ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति जारी की थी, जिसे लागू करने की जिम्मेदारी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) को दी गई है. जुलाई 2026 में ONGC ने लद्दाख में पहले दो जियोथर्मल कुएं स्थापित किए, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.


जियोथर्मल ऊर्जा का उत्पादन

धरती के भीतर अत्यधिक गर्मी होती है, जो यूरेनियम, थोरियम और पोटैशियम जैसे तत्वों के रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न होती है. जियोथर्मल ऊर्जा का उपयोग करने के लिए गहरे कुएं खोदे जाते हैं, जिनसे गर्म पानी और भाप को ऊपर लाया जाता है, जिससे टरबाइन घुमाई जाती है.


भू-तापीय ऊर्जा से संभावनाएं

सौर और पवन ऊर्जा मौसम पर निर्भर करती हैं, जबकि जियोथर्मल ऊर्जा का उपयोग चौबीसों घंटे किया जा सकता है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने 381 गर्म झरनों का नक्शा तैयार किया है, जिससे भारत की जियोथर्मल क्षमता लगभग 10.6 गीगावाट आंकी गई है.


भविष्य की परियोजनाएं

भारत में पुराने तेल और गैस कुओं का पुनः उपयोग करने की योजना है. MNRE ने जुलाई से अगस्त 2025 के बीच पांच रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसमें गुजरात के अंकलेश्वर में एक पायलट प्रोजेक्ट शामिल है.


वर्तमान स्थिति

हालांकि, भारत में अभी तक कमर्शियल स्तर पर जियोथर्मल बिजली का उत्पादन शुरू नहीं हुआ है. सरकार कुओं के विस्तार और डेमो प्रोजेक्ट्स के माध्यम से इसके लिए आधार तैयार कर रही है. वैश्विक स्तर पर, जियोथर्मल तकनीक पहले से स्थापित है, और भारत ने इसे एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना है.