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भारत में मेनोपॉज उपचार के लिए प्रेमारिन क्रीम की बिक्री पर रोक

भारत में मेनोपॉज से संबंधित समस्याओं के उपचार के लिए प्रेमारिन वेजाइनल क्रीम की बिक्री को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यह निर्णय सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण लिया गया है, जिससे महिलाओं के लिए उपचार के विकल्प सीमित हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेमारिन के विकल्प के रूप में अन्य हार्मोनल थेरेपी उपलब्ध हैं, लेकिन हर महिला के लिए एक ही उपचार उपयुक्त नहीं होता। जानें इस स्थिति में महिलाओं के लिए क्या विकल्प हैं और विशेषज्ञों की सलाह क्या है।
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प्रेमारिन क्रीम की बिक्री पर अस्थायी रोक

भारत में मेनोपॉज से संबंधित समस्याओं के उपचार में प्रयुक्त 'प्रेमारिन वेजाइनल क्रीम' की बिक्री को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यह निर्णय दवा निर्माता कंपनी फाइजर द्वारा सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण लिया गया है। इससे मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को योनि में सूखापन, जलन और दर्द जैसी समस्याओं से राहत पाने के लिए उपचार के विकल्प सीमित हो गए हैं।


प्रेमारिन की भूमिका और विकल्प

प्रेमारिन एक एस्ट्रोजन आधारित चिकित्सा है, जिसका उपयोग विशेष रूप से मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी से उत्पन्न लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। पिछले वर्ष में भारत में इसकी 6.2 लाख से अधिक यूनिट्स की बिक्री हुई थी, और यह इस श्रेणी की प्रमुख दवाओं में से एक मानी जाती थी।


महिलाओं के लिए उपलब्ध विकल्प

डॉक्टरों के अनुसार, प्रेमारिन के विकल्प के रूप में कुछ अन्य हार्मोनल थेरेपी उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन हर महिला के लिए एक ही उपचार उपयुक्त नहीं होता। भारत में प्रेमारिन के अलावा Evalon vaginal cream जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, जो विभिन्न प्रकार के एस्ट्रोजन पर आधारित हैं। इसके अतिरिक्त, डॉक्टर मेनोपॉज के लक्षणों के आधार पर स्थानीय एस्ट्रोजन थेरेपी, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) या गैर-हार्मोनल उपचार का सुझाव दे सकते हैं। उपचार का चयन महिला की उम्र, लक्षणों, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिमों के आधार पर किया जाता है।


दवा बदलने से पहले सलाह लें

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेमारिन का विकल्प चुनने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है। हार्मोन से संबंधित दवाओं को अपनी मर्जी से शुरू या बंद करने से बचना चाहिए। भारत में मेनोपॉज के प्रति जागरूकता अभी भी कम है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़े लक्षणों का सामना कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की दवाओं की उपलब्धता में कमी से महिलाओं को समय पर उपचार प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।