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भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹62,500 करोड़ की नई योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फ़ोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹62,500 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी और इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इस योजना के तहत कंपनियों को प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव मिलेगा, जिससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। जानें इस योजना के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फ़ोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में मोबाइल फोन के उत्पादन को बढ़ावा देना, स्थानीय मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में स्थापित करना है।


पांच साल तक चलेगी योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने इस योजना को मंजूरी दी है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक, यानी पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।


PLI-LSEM योजना का स्थान लेगी

यह योजना 'बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम' (PLI-LSEM) की जगह लेगी, जो 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो गई थी। इस योजना के तहत, भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को योग्य बिक्री पर 2.25% से 5% तक का प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव प्राप्त होगा।


अतिरिक्त इंसेंटिव का लाभ

निर्माता मुख्य घटकों और उप-assemblies को घरेलू स्तर पर प्राप्त करने के लिए 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में अधिक स्थानीयकरण को बढ़ावा मिलेगा।