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भारत में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का सफल परीक्षण

भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का सफल परीक्षण किया है, जो पर्यावरण के अनुकूल रेल तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इस योजना के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिससे भारत कार्बन उत्सर्जन को कम करने में योगदान देगा। जानें इस नई तकनीक के बारे में और इसके भविष्य के रूटों के बारे में।
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भारतीय रेलवे का नया कदम

भारतीय रेलवे ने पहली बार हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन कोच का सफल परीक्षण किया है। यह नई तकनीक भविष्य में रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, भारत भी इस प्रयास में योगदान देने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके तहत, भविष्य में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी।


पर्यावरण अनुकूल रेल तकनीक की दिशा में कदम

भारत अब उन देशों में शामिल हो जाएगा जो पर्यावरण के अनुकूल रेल तकनीक को अपनाने की दिशा में अग्रसर हैं। भारतीय रेलवे का उद्देश्य अपने पूरे नेटवर्क को नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला बनाना है। वर्तमान में, ज्यादातर डीजल-इलेक्ट्रिक इंजन का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकती है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' योजना बनाई है।


हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना का उद्देश्य

हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर प्रदूषण को कम करना और ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना है। केंद्र सरकार ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में रेलवे ने 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' योजना बनाई है, जिसके तहत देश के हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी। जींद से शुरू होने वाली यह सेवा इसी योजना की पहली शुरुआत है।


भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेन के रूट

एक हाइड्रोजन ट्रेन के निर्माण पर लगभग 80 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि एक रूट पर हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग जैसी सुविधाओं के विकास के लिए 70 करोड़ रुपये अलग से खर्च किए जाएंगे। कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरी माउंटेन रेलवे, कांगड़ा वैली रेलवे और माथेरान हिल रेलवे जैसे रूट पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें शुरू करने की योजना है।


पहली हाइड्रोजन ट्रेन की विशेषताएँ

जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन में 10 कोच हैं। इसमें एक बार में 2,638 यात्री यात्रा कर सकते हैं। यह ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम है और लगभग 89 किलोमीटर की यात्रा को करीब दो घंटे में पूरा करेगी। वर्तमान में, यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी।