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भारत-यूके सीईटीए: व्यापारिक संबंधों में नया अध्याय

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) आज से लागू हो गया है, जो व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का विस्तार करेगा। यह समझौता किसानों, श्रमिकों और एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण लाभ लाने का दावा करता है। जानें इस समझौते के प्रमुख पहलुओं और इसके भारत के लिए लाभकारी पहलुओं के बारे में।
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व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर


व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे


India-UK CETA, बिजनेस डेस्क : वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में बदलाव के साथ, भारत ने अन्य देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसी क्रम में, आज से भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू हो गया है।


यह समझौता भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, निर्यातकों और सेवा क्षेत्र को महत्वपूर्ण लाभ होगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लागू होने वाला छठा मुक्त व्यापार समझौता है।


इससे पहले भारत ने मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए और ओमान के साथ भी ऐसे समझौते किए हैं। यह पहली बार है जब भारत ने ब्रिटेन में निर्मित पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। आयात शुल्क को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को भी रियायत मिलेगी।


भारत-ब्रिटेन सीईटीए का महत्व

इसलिए खास है भारत-ब्रिटेन सीईटीए


भारत-यूके सीईटीए केवल टैरिफ में कमी लाने वाला समझौता नहीं है, बल्कि यह व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का एक व्यापक ढांचा प्रस्तुत करता है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह भारत के व्यापारिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी, जिससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।


किसानों, उद्योगों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप और युवा पेशेवरों को नए अवसर प्राप्त होंगे।


भारत के लिए लाभकारी पहलू

भारत के लिए इसलिए लाभकारी है यह समझौता


इस समझौते से भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। इसके अलावा, ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी आएगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी। पहली बार, ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की लगभग 40 हजार उच्च मूल्य वाली निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में कार्य की गुणवत्ता में सुधार होगा।