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भारत-रूस रक्षा सहयोग: पुतिन और मोदी के बीच महत्वपूर्ण सैन्य समझौतों पर चर्चा

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भारत-रूस सैन्य सहयोग पर महत्वपूर्ण वार्ता हुई। इस बैठक में चार प्रमुख सैन्य समझौतों और अपग्रेड परियोजनाओं पर चर्चा की गई। एस-400 मिसाइल प्रणाली की डिलीवरी और ब्रह्मोस मिसाइल के संयुक्त विकास पर सहमति बनने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के सु-30एमकेआई विमानों के अपग्रेड और सु-57ई की संभावित खरीद पर भी बातचीत हुई। यह वार्ता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की संभावना को उजागर करती है।
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नई दिल्ली में भारत-रूस सैन्य वार्ता


नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य फोकस भारत-रूस सैन्य सहयोग रहेगा। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और दोनों देशों के सामरिक हितों को ध्यान में रखते हुए, यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक मानी जा रही है। दोनों नेता चार प्रमुख सैन्य समझौतों और उन्नयन परियोजनाओं पर गहन चर्चा करने के लिए तैयार हैं। 2018 में हुए 5.43 अरब डॉलर के समझौते के तहत एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की चार रेजिमेंट पहले ही तैनात की जा चुकी हैं।


घातक प्रहार क्षमता में वृद्धि

घातक प्रहार क्षमता में नया इजाफा 


ब्रह्मोस मिसाइल, जो लगभग 1.3 टन वजनी है, 4322 किमी प्रति घंटे की गति से 400 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसका छोटा आकार इसे तेजस और मिग-29 जैसे भारतीय लड़ाकू विमानों पर आसानी से तैनात करने की अनुमति देता है। पुतिन की यात्रा के दौरान इस घातक मिसाइल के संयुक्त विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात से संबंधित रणनीतिक बिंदुओं पर सहमति बनने की संभावना है।


एस-400 की डिलीवरी और नई बैटरियों का प्रस्ताव

एस-400 की डिलीवरी और नई बैटरियों का प्रस्ताव 


2018 में हुए 5.43 अरब डॉलर के समझौते के तहत एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की चार रेजिमेंट पहले ही तैनात हो चुकी हैं। अब अंतिम और पांचवें स्क्वाड्रन की समयबद्ध डिलीवरी के साथ-साथ भारत में इनके रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) की सुविधा स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत की वायु रक्षा क्षमता को दोगुनी मजबूती देने के उद्देश्य से रूस ने लगभग 50,000 करोड़ रुपये की लागत से पांच अतिरिक्त एस-400 स्क्वाड्रन आपूर्ति करने की पेशकश की है। यह प्रणाली दुश्मन के जेट, मिसाइल और ड्रोन को तेजी से नष्ट करने में सक्षम है और भारत के बहुस्तरीय एयर डिफेंस कवच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।


260 विमानों का महा-अपग्रेड

260 विमानों का महा-अपग्रेड


भारतीय वायुसेना के प्रमुख सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों को आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की योजना भी शीर्ष स्तर पर है। लगभग 11 अरब डॉलर की अनुमानित लागत वाली इस सुपर सुखोई परियोजना के तहत विमानों में नए स्वदेशी रडार, आधुनिक एवियोनिक्स और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां एकीकृत की जाएंगी। इस अपग्रेड प्रक्रिया में मेक इन इंडिया पहल के तहत भारतीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि मौजूदा बेड़े का जीवनकाल बढ़ाते हुए उसे अगले कई दशकों तक प्रासंगिक रखा जा सके।


क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन

क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन


पड़ोसी देशों की बढ़ती स्टील्थ क्षमताओं को देखते हुए सु-57ई (निर्यात संस्करण) की संभावित खरीद पर भी वार्ता केंद्रित है। भारत की अपनी स्वदेशी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना अभी विकास के चरण में है, ऐसे में रूस का यह प्रस्ताव एक अंतरिम और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।