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भारतीय छात्र डार्सी धांडा का BAFTA यंग गेम डिजाइनर्स अवार्ड में चयन

ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र डार्सी धांडा को उनके गेम 'माया' के लिए BAFTA यंग गेम डिजाइनर्स अवार्ड में नामांकित किया गया है। यह गेम एक विधवा की कहानी को दर्शाता है, जो गरीबी और फैक्ट्री जीवन के दबावों से जूझती है। जानें इस गेम के पीछे की प्रेरणा और डार्सी का उद्देश्य क्या है।
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भारतीय छात्र डार्सी धांडा का BAFTA यंग गेम डिजाइनर्स अवार्ड में चयन

डार्सी धांडा का गेम 'माया' और उसकी कहानी


डार्सी धांडा का गेम 'माया' एक विधवा की संघर्षपूर्ण कहानी को दर्शाता है।
ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र डार्सी धांडा को उनके द्वारा विकसित गेम के लिए BAFTA यंग गेम डिजाइनर्स अवार्ड में नामांकित किया गया है। यह गेम एक महिला के जीवन पर आधारित है, जो एक कपड़े की फैक्ट्री में काम करती है और गरीबी से जूझती है। डार्सी, जो स्ट्रैथक्लाइड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर और सूचना विज्ञान के पहले वर्ष के छात्र हैं, को 15-18 वर्ष की श्रेणी में नामांकित किया गया है।


इस गेम में कई दृश्य हैं जो फैक्ट्री के काम और घरेलू जीवन को दर्शाते हैं, जिससे मुख्य पात्र पर पड़ने वाले दबाव को उजागर किया जा सके।


डार्सी का उद्देश्य भावनात्मक जुड़ाव बनाना


डार्सी ने कहा कि गेम के मैकेनिक्स वास्तविक जीवन के कार्य वातावरण की नकल करते हैं और खिलाड़ियों को 'माया' की वास्तविकता का अनुभव कराते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका उद्देश्य ऐसा गेम बनाना था जिससे लोग भावनात्मक रूप से जुड़ सकें।


प्रोफेसर मार्टिन हैल्वी, जो स्ट्रैथक्लाइड में कंप्यूटर और सूचना विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं, ने डार्सी की रचनात्मकता और गेम डिजाइन के माध्यम से अर्थपूर्ण कहानियाँ सुनाने की क्षमता की सराहना की।