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भारतीय रेलवे की नई गति: 115 किमी/घंटा पर दौड़ेंगी ट्रेनें

भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों के लिए एक नई गति का ऐलान किया है, जिसमें औसत गति 115 किमी/घंटा तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। यह परिवर्तन बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मौजूदा बुनियादी ढांचे के माध्यम से किया जाएगा, जिससे यात्रियों का सफर तीन घंटे तक कम हो जाएगा। नई सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल प्रणाली के तहत, रेलवे की क्षमता में वृद्धि होगी और मानव त्रुटियों से होने वाले हादसों में कमी आएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य मार्च 2027 तक पूरा करना है।
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भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक बदलाव

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। रेलवे की औसत गति अब 115 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने वाली है, जो कि भारतीय रेलवे के इतिहास में पहली बार होगा। यह उपलब्धि बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मौजूदा बुनियादी ढांचे के माध्यम से हासिल की जाएगी। इस परिवर्तन के परिणामस्वरूप यात्रियों का सफर कम से कम तीन घंटे तेज हो जाएगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा और भी सरल और तेज हो जाएगी। इसके अलावा, सिग्नलिंग के ऑटोमेशन से मानव त्रुटियों के कारण होने वाले रेल हादसों में 85 से 90 प्रतिशत तक की कमी आएगी।


सीटीसी सिस्टम का कार्यान्वयन

स्टेशन मास्टरों का नियंत्रण समाप्त होगा


रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, रेलवे में एक महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक परिवर्तन किया जा रहा है। पारंपरिक सिग्नलिंग प्रणाली को समाप्त करके अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (सीटीसी) प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत लगभग 300 रेलवे स्टेशनों का नियंत्रण स्थानीय स्टेशन मास्टरों से हटाकर सीधे सीटीसी के पास स्थानांतरित किया जाएगा। इसकी शुरुआत दिल्ली-मुंबई (1,386 किमी) और दिल्ली-कोलकाता (1,445 किमी) मार्ग से की जाएगी। नई तकनीक के माध्यम से सीटीसी केंद्र से 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक की ट्रेनों का सुरक्षित और सटीक संचालन संभव होगा, जिससे मौजूदा पटरियों पर 40 प्रतिशत अधिक ट्रेनें चलाने की क्षमता विकसित होगी।


महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य

मार्च 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट


रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 1 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। नई व्यवस्था के लागू होने से ट्रेनों की औसत गति और यात्रा की क्षमता में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली से मुंबई का सफर, जो वर्तमान में 15 से 16 घंटे में होता है, घटकर लगभग 13 घंटे रह जाएगा। इस प्रकार यात्रियों के लिए 2.5 से 3 घंटे की बचत होगी और मानव त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना भी लगभग समाप्त हो जाएगी।


स्वदेशी तकनीक का समावेश

कवच तकनीक के साथ सीटीसी का एकीकरण


सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल तकनीक की शुरुआत 1927 में अमेरिका में हुई थी। भारत में इसे भारतीय रेलवे के स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। रेलवे का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता रूट पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से वंदे भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें चलाना है। पारंपरिक सिग्नलिंग और मैन्युअल स्टेशन नियंत्रण के साथ इतनी तेज गति से ट्रेनें चलाना संभव नहीं था, लेकिन सीटीसी और कवच का यह नया संयोजन रेलवे के इस सपने को साकार करेगा।