भारतीय रेलवे की यात्री सेवाओं में घाटा: AC क्लास में मुनाफा कैसे?
भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति
भारतीय रेलवे की यात्री सेवाओं से होने वाली आय और संचालन लागत के बीच एक बड़ा अंतर सामने आया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच, पैसेंजर सेवाओं की 9 श्रेणियों में से 7 को 2024-25 में घाटा हुआ। इसका मतलब है कि इन सेवाओं से होने वाली आय, उन्हें चलाने में होने वाले खर्च से कम रही। केवल AC 3 टीयर और AC चेयर कार ऐसी श्रेणियाँ रहीं, जिन्होंने परिचालन खर्च को पार किया और रेलवे को लाभ हुआ।
आर्थिक आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में AC 3 टीयर से रेलवे को 3,645.44 करोड़ रुपये और AC चेयर कार से 376.77 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ हुआ। दूसरी ओर, ऑर्डिनरी क्लास में रेलवे को 20,705.94 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। यह सवाल उठता है कि जब अधिकांश पैसेंजर क्लास घाटे में हैं, तो AC क्लास में लाभ कैसे हो रहा है?
AC टियर और चेयर कार का प्रदर्शन
AC 3 टियर का प्रदर्शन हर साल समान नहीं रहा। 2020-21 में इस क्लास को 6,500.46 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि 2021-22 में भी घाटा 698.12 करोड़ रुपये रहा। 2022-23 में स्थिति में सुधार हुआ और AC 3 टियर को 3,300.08 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। इसके बाद 2023-24 में 2,501.07 करोड़ रुपये और 2024-25 में 3,645.44 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया गया।
AC चेयर कार की स्थिति भी कुछ इसी तरह रही। 2020-21 में इस क्लास को 1,078.55 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जो धीरे-धीरे घटकर 2024-25 में 376.77 करोड़ रुपये के लाभ में बदल गया।
मुनाफे के कारण
AC 3 टीयर में मुनाफा होने का एक कारण यह है कि हाल के वर्षों में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री स्लीपर की बजाय AC 3 टीयर को अधिक पसंद कर रहे हैं। यात्री बेहतर सुविधाओं के लिए थोड़ा अधिक खर्च करने को तैयार हैं। स्लीपर कोच की संख्या कम होने के कारण भीड़ अधिक रहती है, जिससे कई यात्री AC 3 टीयर में यात्रा करना पसंद करते हैं।
वहीं, AC चेयर कार को 2024-25 में मुनाफा होने का मुख्य कारण वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत है। इन ट्रेनों में AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव AC चेयर कार जैसी श्रेणियाँ होती हैं।
अन्य क्लासों में घाटा
2024-25 में स्लीपर क्लास को 19,158.13 करोड़ रुपये, सेकंड क्लास को 15,334.70 करोड़ रुपये और EMU सबर्बन सर्विस को 8,279.04 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। AC-2 को 663.47 करोड़, AC फर्स्ट क्लास को 70.79 करोड़ और फर्स्ट क्लास को 48.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस प्रकार, सबसे अधिक घाटा आम यात्रियों वाली ऑर्डिनरी, स्लीपर और सेकंड क्लास सेवाओं में हुआ।
