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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों को हुआ बड़ा नुकसान

भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते गिरावट के साथ शुरुआत की। सेंसेक्स और निफ्टी में महत्वपूर्ण कमी आई है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। जानें बाजार की स्थिति, प्रमुख लूजर्स और विशेषज्ञों की राय इस गिरावट के पीछे के कारणों पर।
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शेयर बाजार में गिरावट का कारण

मुंबई - कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को गिरावट के साथ शुरुआत की। सुबह 9:17 बजे सेंसेक्स 526.96 अंक या 0.71 प्रतिशत की कमी के साथ 73,368.78 पर और निफ्टी 174.20 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,966.30 पर पहुंच गया।


बाजार पर दबाव

प्रारंभिक कारोबार में फाइनेंशियल और रियल्टी स्टॉक्स पर दबाव देखा गया। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज लगभग एक प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष लूजर्स में शामिल थे।


सूचकांकों की स्थिति

निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी ऑयल एंड गैस सभी सूचकांक लाल निशान में थे।


मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट

लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 624 अंक या 1.03 प्रतिशत की कमी के साथ 60,267 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 214 अंक या 1.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,500 पर था।


सेंसेक्स पैक में प्रमुख लूजर्स

सेंसेक्स पैक में एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, बीईएल, एचयूएल, एलएंडटी, बजाज फिनसर्व, एमएंडएम, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, इंडिगो, भारती एयरटेल, इटरनल, ट्रेंट और मारुति सुजुकी शीर्ष लूजर्स रहे। केवल टीसीएस ही हरे निशान में रहा।


वैश्विक बाजारों की स्थिति

वैश्विक बाजारों में भी गिरावट का माहौल था। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, सोल और जकार्ता सभी लाल निशान में थे। हालांकि, हांगकांग में स्थिति थोड़ी बेहतर थी। अमेरिकी शेयर बाजार ने शुक्रवार को तेजी के साथ कारोबार समाप्त किया, जिसमें डाओ जोन्स 0.93 प्रतिशत और नैस्डैक 0.48 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बंद हुआ।


विश्लेषकों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था और बाजार में दो विपरीत स्थितियां देखी जा रही हैं। जबकि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और कंपनियों की कमाई बढ़ रही है, बाजार लगातार गिरावट का सामना कर रहा है। यह बाहरी कारकों का प्रभाव है। ब्रेंट क्रूड का 106 डॉलर प्रति बैरल के करीब होना और अमेरिका के 10 साल के बॉंड यील्ड का 5.2 प्रतिशत पर होना बाजार पर दबाव डाल रहा है। जुलाई और अगस्त में खरीदार बनने के बाद, एफपीआई सितंबर में फिर से बिकवाल बन गए हैं, जिससे आने वाले समय में बाजार पर दबाव बना रहेगा।