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भारतीय सशस्त्र बलों में एकीकृत कमान की दिशा में बड़ा कदम

भारतीय सशस्त्र बलों में एकीकृत कमान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रस्तावित थिएटर कमांड प्रणाली से तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ेगा, जिससे युद्ध जैसी स्थितियों में तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे। हालांकि, इस बदलाव के लिए कई चुनौतियाँ भी हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है। यदि यह योजना मंजूर होती है, तो भारत अमेरिका और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
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नई दिल्ली में सैन्य सुधार की प्रक्रिया


नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों में लंबे समय से चल रहे महत्वपूर्ण सैन्य सुधार अब एक निर्णायक चरण में पहुंच रहे हैं। सरकार तीनों सेनाओं को एकीकृत कमान के तहत लाने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। जल्द ही थिएटर कमांड का विस्तृत प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को प्रस्तुत किया जा सकता है। इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा रक्षा सुधार माना जा रहा है।


थिएटर कमांड की संरचना

थिएटर कमांड एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें सेना, नौसेना और वायुसेना एक साझा कमांडर के नेतृत्व में काम करेंगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार, तीन प्रमुख कमांड स्थापित की जाएंगी: पहली उत्तरी सीमा पर चीन से संबंधित मोर्चे के लिए, दूसरी पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के लिए, और तीसरी समुद्री सुरक्षा के लिए। प्रत्येक कमांड का नेतृत्व चार सितारा अधिकारी करेगा।


युद्ध के दौरान लाभ

युद्ध के दौरान क्या होगा फायदा?


इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को बढ़ाना है। वर्तमान में अलग-अलग कमांड के कारण कई निर्णय लेने में समय लगता है। थिएटर कमांड लागू होने के बाद, भूमि, समुद्र और आकाश में एक साथ कार्रवाई करना सरल होगा। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और युद्ध जैसी स्थितियों में तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे।


बदलाव की चुनौतियाँ

क्यों आसान नहीं है यह बदलाव?


विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार केवल प्रशासनिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह पूरी सैन्य संरचना में एक बड़ा बदलाव होगा। तीनों सेनाओं के अपने नियम, प्रक्रियाएँ और संसाधन हैं। कमान, बजट और जिम्मेदारियों के बंटवारे जैसे कई मुद्दों पर अभी भी चर्चा चल रही है। इन पहलुओं को अंतिम रूप देने के बाद ही योजना को लागू किया जाएगा।


दो दशकों की तैयारी

दो दशक पुरानी तैयारी


कारगिल युद्ध के बाद पहली बार संयुक्त सैन्य कमान की आवश्यकता महसूस की गई थी। वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद स्थापित करके इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। अब जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार इसे आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं और आत्मनिर्भर रक्षा नीति के अनुरूप मानती है।


फैसले की प्रतीक्षा

अब फैसले पर टिकी हैं उम्मीदें


यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति इस योजना को मंजूरी देती है, तो भारत अमेरिका और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां एकीकृत सैन्य कमान की व्यवस्था पहले से लागू है। हालांकि, इसे पूरी तरह से लागू होने में कुछ वर्ष लग सकते हैं। वर्तमान में रक्षा मंत्रालय अंतिम मसौदे पर विचार कर रहा है और निकट भविष्य में इस पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।