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भारतीय सेना ने अरुणाचल में चीनी घुसपैठ की खबरों को किया खारिज

भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा घुसपैठ की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सेना ने कहा कि ये रिपोर्टें निराधार हैं। नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष ने भी चीनी सैनिकों द्वारा उनकी ज़मीन पर कब्जा करने का दावा किया है, लेकिन उन्होंने भारतीय सेना पर भरोसा जताया है। 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से भारत-चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ा था, लेकिन अब स्थिति में सुधार हो रहा है। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है।
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भारतीय सेना का स्पष्ट बयान


नई दिल्ली: भारतीय सेना ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा घुसपैठ की खबरों को पूरी तरह से गलत बताया। सेना ने कहा कि ये रिपोर्टें 'बेतुकी' हैं और इनका 'कोई आधार नहीं' है।


सेना का बयान: मीडिया रिपोर्ट्स निराधार

सेना ने अपने बयान में कहा, "हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं जिनमें अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA द्वारा घुसपैठ करने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्टें गलत हैं और इनका कोई आधार नहीं है।"


कई स्थानीय मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया था कि पिछले छह वर्षों में PLA के सैनिकों ने ऊपरी सुबनसिरी जिले में घुसपैठ की है। ये खबरें 'नाह' आदिवासी समुदाय के दावों पर आधारित थीं, जो कह रहे थे कि घुसपैठ के कारण उन्हें अपने मवेशियों को चराने में कठिनाई हो रही है।


नाह वेलफेयर सोसाइटी का दावा: 2020 से कब्जा

नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा कि चीनी सैनिकों ने उनकी 'पुश्तैनी ज़मीन' और शिकार के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है। चाडर का कहना है कि 2020 से कई इलाके चीनी कब्जे में हैं, लेकिन उन्होंने भारतीय सेना पर भरोसा जताया है।


गलवान झड़प के बाद स्थिति में सुधार

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया था, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे। हालांकि, अब स्थिति में सुधार हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।


सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि गलतफहमियों को दूर करने के लिए 1,100 से अधिक बार बातचीत हो चुकी है।


सेना प्रमुख का बयान: शांति के लिए ताकत

जनरल द्विवेदी ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति स्थिर है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना चीन के साथ संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।


उन्होंने कहा, "सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत ने शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमारा दृष्टिकोण 'ताकत के जरिए शांति' पर आधारित है।"