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भूटान में ग्लेशियर झील फटने से भारत में बाढ़ का खतरा, पश्चिम बंगाल और असम में अलर्ट

भूटान के गासा जिले में शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी का भारी प्रवाह शुरू हुआ है, जिससे भारत के पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इस घटना के बाद, भारत ने विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें जलस्तर में तेजी से वृद्धि की आशंका जताई गई है। उत्तर बंगाल के कई जिलों में प्रशासन अलर्ट पर है, और NDRF तथा SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।
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भूटान झील फटने की घटना


भूटान झील फटने की खबर: हिमालयी क्षेत्र में एक प्राकृतिक आपदा ने भारत और भूटान में चिंता का माहौल बना दिया है। भूटान के गासा जिले में शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी का भारी प्रवाह शुरू हुआ है। इस घटना के कारण पहाड़ी नदियों में जलस्तर बढ़ने और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसका प्रभाव भारत के पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती क्षेत्रों में पड़ने की संभावना है। प्रशासन ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। भारत की ओर से भी संभावित बाढ़ के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जैसे क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट पर है।


ग्लेशियर झील का स्थान

यह घटना भूटान के गासा जिले के लाया गेवोग के लुंगो क्षेत्र में वाकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंताफू झील में हुई। 29 अक्टूबर की शाम को झील से अचानक पानी का बहाव शुरू हुआ। इसके बाद आसपास के नदी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सायरन बजाकर सतर्क किया गया और प्रभावित क्षेत्र के कुछ निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। शिंताफू झील उन 17 ग्लेशियर झीलों में से एक है, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। झील से निकले पानी के तेज प्रवाह ने भूटान में सड़क के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया और लाया क्षेत्र का संपर्क भी बाधित किया। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 74 लाख घन मीटर पानी का बहाव हुआ है।


ग्लेशियर झील फटने का प्रभाव

ग्लेशियर झील फटने की घटना को वैज्ञानिक रूप से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। हिमालय के ऊंचे क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी झीलें बनती हैं, जिनका पानी प्राकृतिक बर्फ, चट्टानों और मलबे से बने बांधों के पीछे जमा रहता है। जब ये प्राकृतिक बांध टूटते हैं या उनमें दरारें पड़ती हैं, तो झील का पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। इस दौरान पानी के साथ चट्टानें, मिट्टी और भारी मलबा भी बह सकता है, जिससे नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है और निचले क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है। GLOF की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पानी का तेज बहाव पहाड़ी घाटियों से होते हुए तेजी से नीचे पहुंच सकता है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।


भारत की एडवाइजरी

भूटान में झील से पानी निकलने की सूचना के बाद भारत ने संभावित बाढ़ के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में भूटान के ऊपरी नदी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ के कारण पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी जिले में जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका जताई गई है। पानी का तेज बहाव भारत-भूटान सीमा तक लगभग 6 से 8 घंटे में पहुंचने का अनुमान है। संबंधित प्रशासन को नदी के जलस्तर पर नजर रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।


बंगाल में बाढ़ का खतरा

भूटान में ग्लेशियर झील से पानी निकलने के बाद पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल क्षेत्र में प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। विशेष रूप से संकोश नदी के आसपास बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। अलीपुरद्वार में कुमारग्राम, चेंगमारी, कुमारग्राम टी एस्टेट, पाकरीगुड़ी और भोलका के आसपास संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क किया गया है। जलपाईगुड़ी में नदी के आसपास के निचले इलाकों में प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है। कूचबिहार में तूफानगंज और बक्सीरहाट में NDRF और SDRF की टीमों की तैनाती की गई है। इन क्षेत्रों में संकोश नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। दार्जिलिंग में पहाड़ी क्षेत्रों, तराई और डुआर्स के निवासियों को सतर्क रहने की अपील की गई है। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री एवं कुमारग्राम के विधायक मनोज कुमार ओरांव ने संकोश नदी के आसपास रहने वाले लोगों से जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।