मणिपुर में जातीय हिंसा की घटनाओं में वृद्धि, चार की हत्या
मणिपुर में बढ़ती हिंसा की घटनाएं
नई दिल्ली/इम्फाल। मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से चल रही जातीय हिंसा में हाल के दिनों में तेजी आई है। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच का संघर्ष अब कुकी और नगा समुदायों के बीच भी फैल गया है। शुक्रवार को कामजोंग जिले में एक नई हिंसा की घटना हुई, जहां म्यांमार सीमा के निकट पिलोंग गांव में उग्रवादियों ने तंगखुल नागा समुदाय के चार सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी।
गुरुवार की रात लगभग डेढ़ बजे, पुलिस और स्थानीय निवासियों द्वारा चलाए गए तलाशी अभियान में चारों मृतकों के शव एक सुनसान स्थान से मिले। स्थानीय लोगों का मानना है कि म्यांमार से आए उग्रवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया। मृतकों के शवों पर कई गोलियों के निशान थे। इस हमले में पांच ग्रामीण शामिल थे, जिनमें से एक किसी तरह भागने में सफल रहा।
इस बीच, केंद्र सरकार ने नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के कुछ क्षेत्रों में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) को एक अक्टूबर से अगले छह महीनों के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय वहां की कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया। मणिपुर में गृह मंत्रालय ने पांच जिलों के 13 पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र से बाहर पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। नगालैंड में नौ जिलों और अरुणाचल प्रदेश में तीन जिलों में भी AFSPA को बढ़ाया गया है।
