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मणिपुर में हिंसा जारी, केंद्र ने AFSPA का विस्तार किया

मणिपुर में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं, जहां हाल ही में चार लोगों के शव मिले हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने AFSPA का विस्तार करते हुए मणिपुर को 'अशांत क्षेत्र' का दर्जा दिया है। इस बीच, नगा पीपुल्स फ्रंट ने कुकी नेशनल आर्मी पर हत्याकांड का आरोप लगाया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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मणिपुर में हिंसा की स्थिति

मणिपुर में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। गुरुवार को कामजोंग जिले में चार व्यक्तियों के शव मिले, जिन पर गोलियों के निशान थे। इसके एक दिन बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर को 'अशांत क्षेत्र' का दर्जा छह महीने के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह नया आदेश एक अक्टूबर से प्रभावी होगा। केंद्र सरकार ने पहली बार अप्रैल 2023 में मणिपुर को AFSPA के तहत अशांत क्षेत्र घोषित किया था, और तब से यह स्थिति लगातार बढ़ाई जा रही है।


अशांत क्षेत्र का विस्तार

नए आदेश में पांच जिलों के 13 पुलिस थानों को अशांत क्षेत्र से बाहर रखा गया है। इनमें इंफाल, लैम्फेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोर, पोरोमपट, हेइंगांग, इरीलबांग, थोउबल, बिष्णुपुर, नामबोल और काकचिंग शामिल हैं। इसके अलावा, केंद्र ने नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी AFSPA को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है।


कानून-व्यवस्था की समीक्षा

अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने AFSPA-1958 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए पूरे मणिपुर राज्य को 1 अप्रैल 2026 से छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया है, सिवाय उन पांच जिलों के 13 पुलिस थानों के। मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई है।


उग्रवादियों द्वारा हत्या

मणिपुर में हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को चार लोगों के शव कामजोंग जिले में मिले। मृतकों की पहचान वारेइशिम जाजो, फामी जाजो, बेटरसन जाजो और निंगथेम काशक के रूप में हुई है।


पुलिस का मानना है कि इस घटना में पड़ोसी देश म्यांमा के उग्रवादियों का हाथ हो सकता है। शव म्यांमार सीमा के करीब पिलोंग गांव में पाए गए, जो जिला मुख्यालय से लगभग 34 किमी दूर है। मृतकों का संबंध तांगखुल नगा समुदाय से था।


कुकी नेशनल आर्मी का संदेह

नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के अध्यक्ष अवांगबो न्यूमई ने कहा है कि इस हत्याकांड में कुकी नेशनल आर्मी (बर्मा) का हाथ हो सकता है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की अपील की। मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने इन हत्याओं पर गहरा दुख व्यक्त किया और घटना की निंदा की।


एक पुलिस अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की कि म्यांमार के उग्रवादियों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि म्यांमार के उग्रवादी मणिपुर में घुस आए थे और पांच ग्रामीणों पर हमला किया, जिसमें से एक किसी तरह बच निकला।