Newzfatafatlogo

मणिमहेश यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के लिए धनछौ तक मोबाइल नेटवर्क की सुविधा

मणिमहेश यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट आया है। बीएसएनएल ने धनछौ तक मोबाइल नेटवर्क की सुविधा शुरू की है, जिससे श्रद्धालु अपने परिवार से संपर्क में रह सकेंगे। यह सुविधा यात्रा के दौरान सुरक्षा और संचार को बेहतर बनाएगी। जानें इस यात्रा के बारे में और क्या खास है।
 | 

बीएसएनएल ने शुरू की 4जी सेवाएं


बीएसएनएल ने आज से शुरू की यात्रा के तीसरे पड़ाव तक 4जी सेवाएं


मणिमहेश यात्रा 2026 (भरमौर): मणिमहेश यात्रा, जो भारत की सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक मानी जाती है, पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। इस वर्ष, श्रद्धालु अपने परिवार के सदस्यों के साथ सीधे संपर्क में रह सकेंगे, जिससे वे न केवल बात कर सकेंगे बल्कि चैट भी कर सकेंगे।


यह सुविधा बीएसएनएल के प्रयासों के कारण संभव हुई है। बीएसएनएल ने मणिमहेश तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए धनछौ में मोबाइल टावर स्थापित किया है, जो आज से कार्यशील हो गया है। इसके साथ ही, क्षेत्र में बीएसएनएल की 4जी सेवाएं भी शुरू हो गई हैं।


यात्रा की तिथियाँ

25 अगस्त से शुरू हो रही है यात्रा


इससे पहले, मणिमहेश यात्रा के तीसरे पड़ाव हड़सर तक मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन धनछौ तक यह सुविधा नहीं थी। अब, 25 अगस्त से शुरू होने वाली मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालु गौरीकुंड तक फोन का उपयोग कर सकेंगे।


हालांकि, गौरीकुंड से आगे मणिमहेश तक नेटवर्क की सुविधा अभी भी उपलब्ध नहीं है। हर साल, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, राजस्थान और जम्मू से बड़ी संख्या में भक्त मणिमहेश यात्रा पर आते हैं। कनेक्टिविटी की कमी के कारण वे अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाते थे, जिससे कई बार चिंता उत्पन्न होती थी।


मोबाइल नेटवर्क का लाभ

पांच पड़ाव की यात्रा में तीन पड़ाव तक मोबाइल नेटवर्क


मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन यात्रा माना जाता है। श्रद्धालुओं को कठिन रास्तों, ऊँचे पहाड़ों, ग्लेशियरों और नालों को पार करना होता है। यह यात्रा पांच पड़ावों में पूरी होती है: पहला भरमौर, दूसरा हड़सर, तीसरा धनछौ, चौथा गौरीकुंड और अंतिम मणिमहेश।


श्रद्धालुओं को होगा बहुत ज्यादा फायदा


इस यात्रा में अब श्रद्धालु लंबे समय तक अपने परिवार के संपर्क में रह सकेंगे। किसी भी आपात स्थिति में वे अपने परिजनों से बात कर सकेंगे, जिससे न केवल श्रद्धालुओं का उत्साह बना रहेगा बल्कि उनके परिवार भी कम चिंतित होंगे।


पिछले वर्ष यात्रा के दौरान बादल फटने से लगभग 25,000 श्रद्धालु फंस गए थे, जिसमें 20 श्रद्धालुओं की मृत्यु भी हुई थी। उस समय संपर्क की कमी से परिवारों में चिंता बढ़ गई थी। अब मोबाइल कनेक्टिविटी के चलते श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।