मतदाता पंजीकरण में नया बदलाव: ऑनलाइन फॉर्म-6 में शामिल हुआ नया डिक्लेरेशन
नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली: भारत में नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की घोषणा की है। अब, जो लोग ऑनलाइन वोटर बनने के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें फॉर्म-6 में अपने या अपने माता-पिता की पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में मौजूदगी से संबंधित जानकारी प्रदान करनी होगी। इस बदलाव के कारण ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पहले से अधिक विस्तृत हो गई है।
आवेदकों से पूछे जाने वाले प्रश्न
सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग के ECINET पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन फॉर्म-6 में एक नया घोषणा-पत्र जोड़ा गया है। इसमें आवेदक से पूछा जाएगा कि क्या उनका या उनके माता-पिता का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में था। यदि उत्तर हां है, तो उन्हें संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ संख्या और क्रमांक जैसी जानकारी भी भरनी होगी।
बदलाव पर उठ रहे सवाल
हालांकि, इस बदलाव को लेकर कुछ सवाल भी उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि फॉर्म-6 में इस संशोधन के लिए अब तक कोई कानूनी अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इसके अलावा, ऑफलाइन डाउनलोड किए जाने वाले फॉर्म-6 में यह नया डिक्लेरेशन शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि कागजी आवेदन करने वाले लोगों को यह अतिरिक्त जानकारी नहीं देनी होगी, जबकि ऑनलाइन आवेदन करने वालों के लिए इसे भरना अनिवार्य बना दिया गया है।
कौन से राज्यों में लागू हो रहा है यह नया नियम
निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह व्यवस्था उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो रही है, जहां वर्ष 2025-26 के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है या चल रहा है। बिहार इस प्रक्रिया से अलग है, क्योंकि वहां SIR पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि असम में कानूनी कारणों से यह अभियान नहीं चलाया गया है।
फॉर्म में दिए गए विकल्प
नए डिक्लेरेशन में आवेदकों को तीन विकल्प दिए गए हैं: पहला, उनका नाम पिछली SIR सूची में था; दूसरा, उनके माता-पिता का नाम सूची में था; और तीसरा, न तो उनका और न ही उनके माता-पिता का नाम सूची में था। पहले दो विकल्प चुनने वालों को अतिरिक्त जानकारी प्रदान करनी होगी, जबकि तीसरे विकल्प के लिए आगे की प्रक्रिया के बारे में अभी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं।
फॉर्म-6 का उपयोग पहली बार वोटर बनने वाले, नई नागरिकता प्राप्त करने वाले या जिनका नाम पहले मतदाता सूची से हट चुका है, उनके पुनः पंजीकरण के लिए किया जाता है। इस प्रकार, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में हुए इस बदलाव को भविष्य की मतदाता पंजीकरण व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
