मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान का एक साल पूरा, 5.8 करोड़ नाम हटाए गए
मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया
चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कहा जाता है, को एक वर्ष पूरा हो गया है। इस दौरान भारत के 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की गहन समीक्षा की गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 5.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। वर्तमान में, तीसरे चरण के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया जारी है।
इस अभियान की शुरुआत पिछले साल 24 जून को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले की गई थी। इसके बाद, 4 नवंबर से इसका दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसमें 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की विशेष जांच की गई।

यदि हम आंकड़ों पर गौर करें, तो इस अभियान का सबसे अधिक प्रभाव उत्तर प्रदेश में देखा गया। दूसरे चरण के पुनरीक्षण के दौरान, उत्तर प्रदेश से रिकॉर्ड 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान है, जहां 83.86 लाख मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए।
मतदाता सूची में कमी
मतदाता सूची में 10.2% की कमी
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण से पहले इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 50.99 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर 45.81 करोड़ रह गई है। इसका मतलब है कि मतदाता सूची में 5.18 करोड़ नाम कम हुए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है। हटाए गए नामों में 66.88 लाख मृत मतदाता शामिल हैं, जिनमें से सबसे अधिक 25.47 लाख उत्तर प्रदेश और 24.16 लाख पश्चिम बंगाल के थे। इसके अलावा, आपत्तियों और जांच के बाद 63.16 लाख अन्य नाम भी सूची से हटा दिए गए हैं।
तीसरे चरण की प्रक्रिया
अब तीसरे चरण की बारी
चुनाव आयोग ने 14 मई से SIR का तीसरा चरण आरंभ किया है। इसमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, हरियाणा, झारखंड, पंजाब, ओडिशा, उत्तराखंड सहित 16 राज्यों और दिल्ली, चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली-दमन एवं दीव जैसे तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इन राज्यों में लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं की सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है।
