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मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित, चौथा राज्य बना

मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को पारित किया, जिससे यह देश का चौथा राज्य बन गया। इस विधेयक के तहत एक से अधिक विवाह करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और लिव-इन रिलेशनशिप को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। विपक्ष ने विधेयक का विरोध किया है, इसे राजनीतिक एजेंडा करार देते हुए। जानें इस विधेयक के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान।
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समान नागरिक संहिता का विधेयक पारित

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को जोरदार हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया। इस प्रकार, उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य बन गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जब सदन में विधेयक का समर्थन किया, तब कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी कर विरोध जताया। विपक्ष के लगातार हंगामे के बावजूद, सरकार ने विधेयक को सदन से पारित कराने में सफलता प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लंबे समय से तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करना है और इस मुद्दे पर विपक्ष का रुख दोहरा है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।


एक से अधिक विवाह पर होगी कार्रवाई


मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में एक से अधिक विवाह करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कानून महिलाओं को न्याय दिलाने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।


लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य


विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। कानून लागू होने के बाद, लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने संबंध को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में कानूनी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।


हलाला प्रथा को दंडनीय अपराध माना जाएगा


यूसीसी लागू होने के बाद तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए हलाला जैसी शर्त थोपना, मजबूर करना या इसे बढ़ावा देना दंडनीय अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया है, जबकि विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक एजेंडा करार दिया। विधानसभा से पारित होने के बाद अब विधेयक के कानून बनने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।