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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया और कहा कि पार्टी की पहचान खोना मां के बच्चे को खोने के समान है। इस विवाद के बीच, ममता ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करने का निर्णय लिया है। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के बारे में और अधिक जानकारी।
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चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी, जो तृणमूल कांग्रेस पार्टी की नेता हैं, ने चुनाव आयोग द्वारा उनके पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का मूल नाम और फूल-घास वाला चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है, जिससे ममता के गुट को अब इनका उपयोग करने से रोका गया है.


तृणमूल कांग्रेस में गुटबाजी

तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न आवंटित किए हैं। अरूप रॉय के गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चिह्न दिया गया है, जबकि ममता बनर्जी के गुट को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न मिला है.


ममता बनर्जी का लोकतंत्र पर बयान

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस निर्णय को लोकतंत्र के लिए एक काला दिन करार दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का असली नाम और चिह्न खो देना ऐसा है जैसे कोई मां अपने बच्चे को खो दे.


सुप्रीम कोर्ट में याचिका

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें यह अंतरिम व्यवस्था स्वीकार नहीं है और वे कानूनी, राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मूल पहचान को वापस पाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। इसी कारण से, उन्होंने चुनाव आयोग के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.


नंदीग्राम उपचुनाव पर ममता का निर्णय

ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार न उतारने का निर्णय लिया है। उनका गुट कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ममता बनर्जी के गुट ने इसे अलोकतांत्रिक निर्णय बताया है.