महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के सह-संस्थापक रवि उप्पल की दुबई में गिरफ्तारी
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़ी बड़ी गिरफ्तारी
भारतीय जांच एजेंसियों को महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। इस मामले में मुख्य आरोपी और ऐप के सह-संस्थापक रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को इस गिरफ्तारी की पुष्टि की और इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया।
सौरभ चंद्राकर की प्रत्यर्पण प्रक्रिया
यह घटना तब हुई जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऐप के दूसरे सह-संस्थापक सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की।
UAE से आधिकारिक सूचना का इंतजार
भारतीय एजेंसियों को उप्पल की गिरफ्तारी की जानकारी अनौपचारिक स्रोतों से मिली है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अभी तक भारत को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी है। भारतीय अधिकारी इसकी पुष्टि करने और उप्पल के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
रवि उप्पल का नेटवर्क
रवि उप्पल, जो छत्तीसगढ़ के भिलाई का निवासी है, दुबई से अपना नेटवर्क चलाता था। अक्टूबर 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। दिसंबर 2023 में दुबई प्रशासन ने उसे हिरासत में लिया, लेकिन 45 दिन बाद उसे रिहा कर दिया गया। ED ने जनवरी 2024 में उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था।
वानुआतु के पासपोर्ट का मामला
ED के एक अधिकारी के अनुसार, उप्पल और चंद्राकर दोनों के पास वानुआतु के पासपोर्ट हैं, जो उन्होंने भारत से बाहर जाने के बाद प्राप्त किए।
बेटिंग नेटवर्क और हवाला कारोबार
ED के दस्तावेजों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) के प्रचार और संचालन का कार्य देखता था, जबकि उप्पल दुबई में मुख्य कार्यालय का संचालन करता था। वह वित्तीय नेटवर्क और हवाला के जरिए पैसे भेजने के साथ-साथ नागपुर में बेटिंग ऑपरेटरों के प्रबंधन से भी जुड़ा था।
94 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा
ED का आरोप है कि महादेव बेटिंग ऐप का नेटवर्क छत्तीसगढ़ में स्थानीय पुलिस और नेताओं के सहयोग से संचालित होता था। एजेंसी के अनुसार, कुछ नौकरशाहों और प्रभावशाली व्यक्तियों को इस अवैध कारोबार को नजरअंदाज करने के लिए रिश्वत दी जाती थी।
जांच एजेंसी ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े अन्य प्लेटफार्मों के कुल लेनदेन का अनुमान 94 हजार करोड़ रुपये लगाया है। ED का दावा है कि इसमें से 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये प्रमोटरों तक पहुंचाए जा चुके हैं।
