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महाराष्ट्र के CEO ने चुनाव आयोग से ECINet में बदलाव की मांग की

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINet सॉफ्टवेयर में चार महत्वपूर्ण बदलावों की मांग की है। इनमें ERO को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता शामिल है, खासकर 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' वाले मामलों में। आयोग ने कुछ मांगों को स्वीकार किया है, जबकि राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 21.1% की कमी आई है। जानें इस प्रक्रिया के बारे में और क्या बदलाव हो सकते हैं।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नई मांग

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस चोक्कलिंगम ने चुनाव आयोग से ECINet सॉफ्टवेयर में चार महत्वपूर्ण संशोधन करने का अनुरोध किया है। यह मांग राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के नोटिस चरण से संबंधित है। उन्होंने चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ERO) को कुछ मामलों में अधिक अधिकार देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। दो चुनाव आयुक्त भी इस तरह की मांगों का समर्थन कर चुके हैं।


SIR प्रक्रिया और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी

महाराष्ट्र इस समय SIR के नोटिस चरण में है। CEO एस चोक्कलिंगम ने आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि EROs को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाले मामलों में निर्णय लेने की अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी क्या है?

SIR के दौरान, ECINet सॉफ्टवेयर मतदाता के रिकॉर्ड को पिछले SIR की मतदाता सूची में उसके माता-पिता या दादा-दादी के रिकॉर्ड से जोड़ने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया में कुछ मामलों में जानकारी का मिलान न होने पर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ उत्पन्न होती है।


ERO को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र CEO ने SIR के नोटिस पर कार्रवाई करते समय EROs को अधिक विकल्प देने की मांग की है। कानून के अनुसार, मतदाता सूची की जिम्मेदारी ERO की होती है, और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक ERO होता है। EROs आमतौर पर SDM स्तर के अधिकारी होते हैं। उनका कार्य मतदाता सूची तैयार करना, दावों और आपत्तियों की सुनवाई करना और यह तय करना होता है कि किन नामों को सूची में शामिल किया जाए या हटाया जाए। CEO की एक अन्य मांग यह है कि यदि ERO किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों से संतुष्ट है, तो उसे उस व्यक्ति को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का अधिकार भी होना चाहिए।


चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

आयोग ने 26 सितंबर को क्या कहा?

26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक के बाद जारी बयान में महाराष्ट्र की मांगों के कुछ हिस्सों को स्वीकार किया गया। आयोग ने EROs को उन व्यक्तियों को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने का अधिकार दिया, जिनके रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ पाई गई है। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए गए हैं।


ERO के अधिकारों का मुद्दा

पहले भी उठ चुका है ERO के अधिकार का मुद्दा

रिपोर्ट के अनुसार, EROs को अधिक अधिकार देने की मांग पहले भी चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा उठाई जा चुकी है। संधू ने 14 अगस्त को कहा था कि मतदाता सूची से जुड़े वैधानिक अधिकारी- CEO, DEO और ERO शिकायत कर रहे थे कि वे अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर पा रहे हैं।


मतदाता सूची में कमी

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 21.1% मतदाता कम

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को प्रकाशित हुई थी, जिसमें राज्य के कुल मतदाताओं में 21.1 फीसदी की कमी आई है। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी होने वाली है। CEO एस चोक्कलिंगम ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिनमें ज्यादातर ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो अन्य स्थानों पर चले गए हैं।