महाराष्ट्र में शिवसेना में बड़ा बदलाव: उद्धव ठाकरे के सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल
राजनीतिक हलचल का नया दौर
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की शिवसेना में एक बार फिर से राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले समूह के छह सांसद सोमवार को आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। सांसदों ने पहले शिंदे के सरकारी निवास नंदनवन में बैठक की और फिर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने निर्णय की घोषणा की। इसे शिवसेना की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण विभाजन के रूप में देखा जा रहा है।
सांसदों की बैठक और रणनीति
सांसदों ने पार्टी बदलने से पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सरकारी आवास पर बैठक की, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होने का निर्णय लिया। इस अवसर पर शिंदे ने कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और पार्टी की मूल पहचान को बनाए रखने के लिए है।
लोकसभा में शक्ति संतुलन में बदलाव
छह सांसदों के शामिल होने से लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत में वृद्धि हुई है। अब उनके सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव ठाकरे के गुट के पास केवल तीन सांसद रह गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2022 के बाद शिवसेना में हुआ दूसरा बड़ा विभाजन मानते हैं, जिसका प्रभाव आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया
सांसदों के दल बदलने पर उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने अपनी वफादारी पर सवाल उठाए हैं। आदित्य ने आरोप लगाया कि यह निर्णय राजनीतिक लाभ और लालच के कारण लिया गया है। उनके बयान के बाद दोनों गुटों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
उद्धव ठाकरे की बैठक
इस घटनाक्रम के बीच, उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई। बैठक में मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। हालांकि, चार विधायक इस बैठक में शामिल नहीं हो सके। पार्टी नेतृत्व ने संगठन को मजबूत बनाए रखने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने पर जोर दिया।
संजय राउत की टिप्पणी
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिंदे ने छह "गद्दार" पैदा किए हैं और अब स्थिति को संभालने के लिए सर्जरी की आवश्यकता है। इसी बीच, राउत ने जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे 27 जून से महाराष्ट्र में जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे, जिसमें वे उन क्षेत्रों का दौरा करेंगे जहां से बागी सांसद चुने गए हैं।
